वार्ड 2 में 15 प्रत्याशियों की जंग, सबकी नजर इस युवा चेहरे पर; सुबह से रात तक झोंक रहे ताकत
वार्ड 2 में 15 प्रत्याशियों की जंग, सबकी नजर इस युवा चेहरे पर; सुबह से रात तक झोंक रहे ताकत
बीकानेर। नगर निगम चुनाव को लेकर अब तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। कल होने वाली वोटिंग से पहले वार्डों में चुनावी प्रचार अपने चरम पर पहुंच गया है। प्रत्याशी मतदाताओं तक पहुंच बनाने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। कहीं मुकाबला दो प्रमुख दलों के बीच सीधा नजर आ रहा है तो कहीं निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने चुनावी गणित को उलझा दिया है। इसी बीच वार्ड 2 इस बार खासा चर्चा में है। वजह है यहां से चुनावी मैदान में उतरे 15 प्रत्याशी। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवार होने के कारण वार्ड का मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है। हर प्रत्याशी अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं को साधने में जुटा है। हालांकि इन सभी के बीच भाजपा के युवा प्रत्याशी दीपक व्यास की सक्रियता खास तौर पर नजर आ रही है।
दीपक व्यास लगातार मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं। सुबह की शुरुआत जनसंपर्क से लेकर देर रात तक बैठकों और प्रचार का सिलसिला जारी है। वे वार्ड के अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और अपनी प्राथमिकताओं को उनके सामने रख रहे हैं। युवा प्रत्याशी होने के कारण दीपक व्यास का फोकस खास तौर पर वार्ड के युवाओं और नए मतदाताओं पर भी है। चुनाव प्रचार के दौरान वे स्थानीय समस्याओं के साथ-साथ वार्ड के विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। वार्ड 2 में कांग्रेस की ओर से संजय आचार्य चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस प्रत्याशी भी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं। लेकिन वार्ड की सबसे बड़ी खासियत यहां मौजूद निर्दलीय प्रत्याशियों की बड़ी संख्या है। 15 उम्मीदवारों के मैदान में होने से वोटों का बंटवारा चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास ने घर-घर घूम कर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील की, इस दौरान विधायक जेठानंद व्यास और भाजपा प्रत्याशी दीपक व्यास के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक नजर आए।
राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि निर्दलीय प्रत्याशी कितने वोट हासिल करते हैं। यदि निर्दलीय उम्मीदवारों को मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिलता है तो इसका सीधा असर भाजपा और कांग्रेस दोनों के वोट शेयर पर पड़ सकता है। खासकर कांग्रेस के लिए निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी चुनौती बन सकती है। अगर कांग्रेस के परंपरागत मतदाताओं में बिखराव होता है तो इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। हालांकि यही स्थिति भाजपा के लिए भी लागू होती है और अंतिम परिणाम पूरी तरह मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा।
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