बीकानेर: मानसून आने वाला है, लेकिन ये है शहर की स्थिति
बीकानेर। मानसून आने में कुछ दिन शेष हैं, मगर बीकानेर में बिना बारिश के ही सीवरेज और नालों का पानी सड़कों और गलियों में भरा है। नगर निगम के सामने से ऐतिहासिक सूरसागर तक 5 महीने से सीवर का गंदा पानी उफन रहा है। लोग बदबू और गंदगी के बीच से गुजर रहे हैं। मुख्यमंत्री के सेवा शिविर में आने वाले फरियादी भी इसी नरक को पार कर पहुंच रहे हैं।
दावा था कि जल भराव नहीं होगा, पर हकीकत उलट है। दो साल पहले अमृत-2 योजना के तहत 262 करोड़ रुपए की लागत से कीर्ति स्तंभ चौराहे से वल्लभगार्डन तक नई सीवरेज लाइन डाली गई थी। वह सिर्फ जमीन में ही दफन की गई है। जनता पुरानी और जर्जर लाइन का खामियाजा ही भुगत रही है। इस नई लाइन का व्यास पुरानी से 2 से 3 गुना ज्यादा है। अगर यह चालू होती, तो ओवरफ्लो से मुक्ति मिल जाती। नई लाइन तो बिछ गई, लेकिन पब्लिक पार्क में मुख्य पंपिंग स्टेशन आज तक नहीं बना। पंपिंग स्टेशन के बिना नई लाइन चालू नहीं हो सकी। नतीजा यह है कि पुरानी गिन्नाणी और हनुमानहत्था समेत नगर निगम के चारों ओर सीवरेज का पानी मुख्य सड़कों पर उफान मार रहा है।
सीवरेज तो छोड़िए, बरसाती नालों का हाल और बदतर है। जूनागढ़ किले से सटा प्रमुख नाला ओवरफ्लो है। इसका गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है। नगर निगम इसे सीवरेज का पानी बताकर पल्ला नहीं झाड़ सकता, क्योंकि यह नाला सफाई का मामला है। यह मुख्य नाला गिन्नाणी से शुरू होकर जूनागढ़, फोर्ट डिस्पेंसरी, सदर थाना, सर्किट हाउस से पीबीएम अस्पताल तक जाता है। ड्रेनेज सिस्टम सुधार के 59 करोड़ रुपए के बजट में से अकेले इस नाले के लिए 5 करोड़ रुपए आवंटित हैं, फिर भी हालात जस की तस हैं।
Join for Latest News
हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ