आईएएस नीरज के.पवन सहित पांच जनों के खिलाफ चार्जशीट एसीबी नें पेश किया 5 हजार पन्नों के दस्तावेज
एनएचएम घूसखोरी साल-2016 घोटाले से जुड़े मामले में एसीबी ने शुक्रवार को कोर्ट में 5 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की। IAS नीरज के. पवन सहित 5 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। घोटाले का पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए चलाए गए आरोग्य रथ से जुड़ा हुआ है। कागजों में आरोग्य रथ चलाकर एक करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा किया गया।एसीबी ने बताया- प्रदेशभर में स्थास्थ्य विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रचार के लिए आरोग्य रथ चलाया गया था। प्रदेशभर में चलाए आरोग्य रथ के नाम पर करीब 1 करोड़ रुपए के फेक बिल तैयार कर पेमेंट उठाया गया।एसीबी जांच में सामने आया कि साल-2016 में चलाए आरोग्य रथ कागजों में चलाया गया था। फर्जीवाड़े के समय नीरज के. पवन NHM में डायरेक्टर थे। उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति साल-2021 में मिली थी। इसके साथ ही अकाउंटेंट जोजी वर्गीस और एएओ दीपा गुप्ता था। दलाल अजीत सोनी ने ठेकेदारों से घूसखोरी की रकम इकट्ठा की थी। आरोग्य पथ के प्रचार-प्रचार का टेंडर सुरेन्द्र सिंह की फर्म को मिला था। टेंडर के लिए सुनील राठौड़ की ओर से फेक डॉक्यूमेंट तैयार कर पेमेंट उठाया गया।
एसीबी की ओर से शुक्रवार दोपहर को आईएएस नीरज के. पवन, जोजी वर्गीस, दीपा गुप्ता, अजीत सोनी और सुनील राठौड़ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। NHM घोटाले को लेकर एसीबी की ओर से 5 हजार पन्नों के चार्जशीट पेश की। लंबे समय से फरार आरोपी सुरेन्द्र सिंह ने एसीबी कोर्ट में शुक्रवार दोपहर सरेंडर कर दिया। एसीबी की ओर से टेंडर फर्म संचालक सुरेन्द्र सिंह के संबंध में जांच पेंडिंग रखी गई है।
17 प्रतितश कमीशन थे वसूलते
NHM घोटाले में फर्मों से 17 फीसदी कमीशन आरोपी वसूलते थे। इसमें से 5 फीसदी टेंडर जारी करने और 12 फीसदी बिलों का पेमेंट करते समय लेते थे। रिश्वत की रकम में 37% हिस्सा नीरज के. पवन को, 12% दीपा गुप्ता, 2% अनिल अग्रवाल, .45% जोजी वर्गीस, .40% सहायक लेखाधिकारी, .25% कैशियर और .35% दलाल अजीत सोनी के हिस्से में जाता था।
2 हजार दिन का उठाया बिल
एसीबी जांच में आया कि आरोग्य रथ के तहत प्रचार करने के लिए NHM आईईसी ब्रॉच के पास 1.60 करोड़ रुपए का बजट था। दलाल अजीत सोनी ने NHM आईईसी ब्रॉच के तत्कालीन एमडी नीरज के. पवन और अन्य से मिलकर बजट 5 करोड़ रुपए करा लिया। इसका टेंडर सुरेन्द्र इलेक्ट्रोटेक को दिया गया था। फर्म ने अक्टूबर से दिसंबर-2015 तक ही काम कर डिपोर्टमेंट को 3 माह के बिल पेश किए। इसमें बताया गया कि रथ 1369 दिन चला है, जबकि दलाल अजीत सोनी से मिलकर अधिकारियों ने 2548 दिनों के बिल पास कर पेमेंट उठा लिया।
एसीबी के खुलासे के बाद चिकित्सा विभाग ने इसकी जांच की तो सामने आया कि तीन माह में केवल 552 दिन ही रथ चला था। जबकि फर्म के मालिक, सोनी, एनएचएम के निदेशक नीरज के पवन, लेखाधिकारी दीपा गुप्ता, अतिरिक्त निदेशक अनिल अग्रवाल व स्टोर कीपर जोजी वर्गीस ने 2 हजार दिनों के फर्जी बिल बनाकर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान उठा लिया।
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