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निगहबानी के साथ आत्मनिर्भरता भी : ऐसी एंटी शिप मिसाइल बना रहा भारत, जिसकी रफ्तार जानकर दुश्मन रह जाएंगे हैरान!

rk
2 weeks ago
निगहबानी के साथ आत्मनिर्भरता भी : ऐसी एंटी शिप मिसाइल बना रहा भारत, जिसकी रफ्तार जानकर दुश्मन रह जाएंगे हैरान!

निगहबानी के साथ आत्मनिर्भरता भी : ऐसी एंटी शिप मिसाइल बना रहा भारत, जिसकी रफ्तार जानकर दुश्मन रह जाएंगे हैरान!

भारत के हाइपरसोनिक हथियार कार्यक्रम में बड़ी प्रगति सामने आई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के समीर वी कामत ने गुरुवार को बताया कि भारत का लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम अब उन्नत चरण में पहुंच चुका है और इसके शुरुआती परीक्षण जल्द किए जा सकते हैं। उन्होंने यह जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन 2.0 के दौरान दी, जहां उन्होंने देश की अगली पीढ़ी की स्ट्राइक क्षमताओं पर विस्तार से बात की।

तटीय सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया विकसित
LR-AShM मिसाइल को खास तौर पर भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है।
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यह एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जो स्थिर और गतिशील दोनों तरह के लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।
इसमें स्वदेशी एवियोनिक्स और अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं, जिससे इसकी सटीकता काफी बढ़ जाती है।
यह मिसाइल मैक 10 (ध्वनि की गति से 10 गुना) यानी लगभग 12,000 किमी/घंटा तक की अधिकतम रफ्तार हासिल कर सकती है और औसतन मैक पांच की गति से कई बार स्किप करते हुए आगे बढ़ती है।
यह 1,500 किमी की मारक क्षमता के लिए डिजाइन की गई है।
यह बैलिस्टिक मिसाइल की तरह सीधी नहीं जाती
यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी का पालन करता है, यानी यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल की तरह सीधी नहीं जाती, बल्कि बीच-बीच में दिशा बदलते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ती है। अंतिम चरण में यह अपने स्वदेशी सेंसरों की मदद से मूविंग टारगेट को भी सटीकता से हिट कर सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है, बहुत तेज गति से चलती है और लगातार दिशा बदल सकती है, जिससे दुश्मन के ग्राउंड और समुद्री रडार के लिए इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

मिसाइल के दो चरण
इस मिसाइल में दो-स्टेज सॉलिड प्रोपल्शन रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है। पहले चरण के खत्म होते ही वह अलग हो जाता है, जबकि दूसरा चरण मिसाइल को हाइपरसोनिक गति तक पहुंचाता है। इसके बाद मिसाइल बिना इंजन के ग्लाइड फेज में प्रवेश करती है और लक्ष्य तक पहुंचने से पहले कई रणनीतिक मूवमेंट करती है।

Sanskar
BC

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