Khulasa Online
TM Jewellers
Bansal sadi
Breaking
• बीकानेर: अचानक पैर फिसल कर गिरा व्यक्ति, टांके में डूबने से हुई मौत • बड़ी खबर: निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, 3 को सुरक्षित निकाला गया • सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश • NEET पेपर लीक मामले में पुणे का केमेस्ट्री प्रोफेसर गिरफ्तार, CBI ने बताया मास्टरमाइंड • मौसम अपडेट: मानसून तय समय से पहले देगा दस्तक, जाने राजस्थान में कब होगी झमाझम बारिश • बीकानेर: अचानक पैर फिसल कर गिरा व्यक्ति, टांके में डूबने से हुई मौत • बड़ी खबर: निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, 3 को सुरक्षित निकाला गया • सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश • NEET पेपर लीक मामले में पुणे का केमेस्ट्री प्रोफेसर गिरफ्तार, CBI ने बताया मास्टरमाइंड • मौसम अपडेट: मानसून तय समय से पहले देगा दस्तक, जाने राजस्थान में कब होगी झमाझम बारिश
jeevan raksha
Sambhav Hospital
Bharti

हीमोफीलिया में इनहिबिटर प्रबंधन पर कार्यक्रम आयोजित, 50 से अधिक बाल रोग विशेषज्ञों ने निभाई सहभागिता

rk
2 months ago
हीमोफीलिया में इनहिबिटर प्रबंधन पर कार्यक्रम आयोजित, 50 से अधिक बाल रोग विशेषज्ञों ने निभाई सहभागिता

खुलासा न्यूज,बीकानेर। बीकानेर पीडियाट्रिक सोसाइटी के तत्वावधान में इनहिबिटर प्रबंधन इन हीमोफीलिया विषय पर एक महत्वपूर्ण सतत चिकित्सा शिक्षा  कार्यक्रम का सफल आयोजन शनिवार, 2 मई को रानी बाजार स्थित होटल द पार्क पैराडाइज़ में किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के 50 से अधिक बाल रोग विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों एवं रेजिडेंट चिकित्सकों ने सक्रिय सहभागिता की।


कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चा अस्पताल, पीबीएम, बीकानेर के विभागाध्यक्ष एवं आचार्य प्रो. (डॉ.) जी. एस. तंवर के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने हीमोफीलिया में इनहिबिटर को सबसे बड़ी चिकित्सकीय चुनौती बताते हुए कहा कि यदि किसी रोगी में जोड़  में रक्तस्राव सामान्य से अधिक समय तक बना रहे या अपेक्षित मात्रा से अधिक फैक्टर की आवश्यकता पड़े, तो चिकित्सकों को इनहिबिटर की संभावना अवश्य विचार में लेनी चाहिए। उन्होंने समय पर स्क्रीनिंग, शीघ्र पहचान और उपयुक्त उपचार रणनीति के महत्व पर जोर दिया।


प्रो. तंवर ने लो-टाइटर एवं हाई-टाइटर इनहिबिटर के अनुसार उपचार के विभिन्न विकल्पों पर प्रकाश डाला तथा एमिसिज़ुमैब को हीमोफीलिया प्रबंधन में एक गेम चेंजर बताया। साथ ही, उन्होंने जीन थेरेपी के माध्यम से हीमोफीलिया से ग्रस्त बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
वैज्ञानिक सत्र में डॉ. गौरव गोम्बर एवं डॉ. श्याम अग्रवाल ने हीमोफीलिया में इनहिबिटर के ऐतिहासिक विकास से लेकर आधुनिक उपचार पद्धतियों तक के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से व्याख्यान दिया।

 


प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान रेजिडेंट चिकित्सकों ने इनहिबिटर जांच, बाईपासिंग एजेंट्स एमिसिज़ुमैब तथा इम्यून टॉलरेंस थेरेपी के व्यावहारिक उपयोग एवं चुनौतियों से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से समाधान प्रस्तुत किया।

 


समापन अवसर पर प्रो. (डॉ.) तंवर ने संदेह करो, जांच करो और उपचार करो के सिद्धांत को हीमोफीलिया प्रबंधन का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि बीकानेर को भविष्य में हीमोफीलिया देखभाल के उत्कृष्ट केंद्र  के रूप में विकसित करने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि ऐसे शैक्षणिक आयोजन भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि क्षेत्र के चिकित्सक नवीनतम चिकित्सा ज्ञान से अद्यतन रह सकें।

 

 

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Tags: #bikaner #rajastahn
Share: