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पीबीएम की टीम ने किया कमाल,  56 दिनों के कठिन उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौटा मासूम

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6 hours ago
पीबीएम की टीम ने किया कमाल,  56 दिनों के कठिन उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौटा मासूम

खुलासा न्यूज,बीकानेर। महज 980 ग्राम वजन, गर्भावस्था के केवल 28 सप्ताह में जन्म, अविकसित फेफड़े और हर पल टूटती-जुड़ती सांसें। जिंदगी की शुरुआत ही मौत से मुकाबले के साथ हुई, लेकिन पीबीएम अस्पताल बीकानेर की एनआईसीयू टीम, आधुनिक चिकित्सा, सतत निगरानी, मां के धैर्य और चिकित्सकों के अथक प्रयासों ने इस नन्हे योद्धा को आखिरकार जिंदगी की जंग जिता दी।

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करीब 56 दिनों तक चले कठिन उपचार के बाद 5 अक्टूबर 2026 को यह नवजात 1265 ग्राम वजन के साथ बिना किसी ऑक्सीजन सपोर्ट के स्वयं सांस लेते हुए और मां का दूध पीते हुए स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से घर लौटा। अत्यंत कम जन्म वजन वाले इस नवजात की सफल रिकवरी को पीबीएम अस्पताल के बाल रोग विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

 


बच्चे का जन्म 10 अगस्त 2026 को चूरू जिले की एक परिधीय स्वास्थ्य इकाई में मात्र 28 सप्ताह के गर्भकाल में हुआ था। जन्म के समय उसका वजन केवल 980 ग्राम था। समय से लगभग तीन महीने पहले जन्म के कारण उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं थे और उसे गंभीर श्वसन समस्या थी। प्रारंभिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन उसे 11 अगस्त को पीबीएम अस्पताल बीकानेर लेकर पहुंचे, जहां एनआईसीयू में भर्ती कर तत्काल उपचार शुरू किया गया।

 


नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल सर्फेक्टेंट थैरेपी दी और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। रक्तचाप एवं अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक मापदंडों को बनाए रखने के लिए इनोट्रोपिक दवाएं दी गईं।  बच्चा लगातार लगभग दस दिनों तक वेंटिलेटर पर रहा इसी बीच उपचार के दौरान बार-बार एपनिया यानी अचानक सांस रुकने की स्थिति उत्पन्न होने लगी। हालात गंभीर होने पर बच्चे को दोबारा इंट्यूबेट कर वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। यलगातार प्रयासों के बाद 28 अगस्त को बच्चे को दोबारा सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटाया गया और इसके बाद उसकी स्थिति धीरे-धीरे स्थिर होती चली गई।

 


नवजात के उपचार में आधुनिक मशीनों और दवाओं के साथ मां की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। परिजनों को कंगारू मदर केयर की नियमित सलाह दी गई। मां ने लगातार बच्चे को अपने सीने से लगाकर कंगारू मदर केयर दी, जिससे शरीर का तापमान बनाए रखने, वजन बढ़ाने और बच्चे की रिकवरी में महत्वपूर्ण सहयोग मिला।


करीब दो महीने के उपचार के बाद 5 अक्टूबर को बच्चे का वजन बढ़कर 1265 ग्राम हो गया। वह बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के स्वयं सांस लेने लगा और स्तनपान भी करने लगा। अस्पताल से छुट्टी देने से पहले आरओपी स्क्रीनिंग कराई गई, जो सामान्य पाई गई। 2डी इको जांच में किसी प्रकार की जन्मजात हृदय संबंधी समस्या सामने नहीं आई और ब्लड कल्चर भी स्टेराइल रहा। इस अत्यंत कम वजन वाले नवजात की सफल रिकवरी बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जी.एस. तंवर के मार्गदर्शन में एनआईसीयू टीम के सामूहिक प्रयासों से संभव हुई। टीम में डॉ. रेनू अग्रवाल, डॉ. कुलदीप सिंह बिठू, डॉ. लक्ष्मण, डॉ. इंदिरा, डॉ. अंजली, डॉ. भरत, डॉ. संजय, डॉ. हर्षित, डॉ. गैलेक्सी, डॉ. ईशा और डॉ. राजेश ने उपचार एवं निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 


वहीं नर्सिंग ऑफिसर्स बसंती, सिगार, धन्नाराम, अनिता, पायल, पिंकी, प्रियंका, तारा, सीमा, नवीन सहित समस्त नर्सिंग स्टाफ ने दिन-रात क्लीनिकल केयर करते हुए बच्चे की हर सांस और हर बदलाव पर निगरानी बनाए रखी।

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