बीकानेर: मंदिर में मारपीट कर पैर तोड़ने के मामले में एक को 4 साल की सजा, दूसरा परिवीक्षा पर रिहा
बीकानेर: मंदिर में मारपीट कर पैर तोड़ने के मामले में एक को 4 साल की सजा, दूसरा परिवीक्षा पर रिहा
बीकानेर। मंदिर में सफाई के दौरान एक व्यक्ति से मारपीट कर उसका पैर तोड़ने के मामले में कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायाधीश चंद्रशेखर पारीक की अदालत ने आरोपी मनोहर भाट को चार वर्ष के कारावास और 5,500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है, जबकि सह-आरोपी दीपक आचार्य को स्वास्थ्य कारणों के चलते एक वर्ष की परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया है।
क्या था मामला?
घटना 26 मई 2020 की है। परिवादी माणक भाट ने रिपोर्ट में बताया था कि वह फायरिंग रेंज स्थित एक मंदिर में सफाई कर रहा था। इसी दौरान मनोहर भाट और दीपक आचार्य वहां पहुंचे और गाली-गलौच करते हुए मारपीट शुरू कर दी। आरोप के अनुसार दोनों ने लाठी और मुक्कों से हमला किया, जिससे माणक के पैर में फ्रैक्चर हो गया और शरीर पर अन्य चोटें आईं। घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया और उपचार के बाद 3 जून 2020 को मामला दर्ज कराया गया।
सुनवाई के दौरान घायल, उसके भाई तथा अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मेडिकल रिपोर्ट में पैर की हड्डी टूटने की पुष्टि हुई। अदालत ने माना कि एफआईआर दर्ज कराने में हुई देरी का कारण घायल का अस्पताल में भर्ती होना था। प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
कोर्ट का फैसला
अदालत ने मनोहर भाट को चार साल के कारावास और जुर्माने से दंडित किया। वहीं दीपक आचार्य को एक वर्ष की परिवीक्षा पर छोड़ा गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि परिवीक्षा अवधि के दौरान शर्तों का उल्लंघन किया गया तो सजा लागू की जा सकती है। परिवादी की ओर से पैरवी अधिवक्ता बजरंग छिंपा ने की।
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