बीकानेर में जयश्रीराम के नारों से गूंजा करणी सिंह स्टेडियम, 85 फीट के रावण का हुआ दहन
बीकानेर में जयश्रीराम के नारों से गूंजा करणी सिंह स्टेडियम, 85 फीट के रावण का हुआ दहन
बीकानेर। विजयादशमी के पर्व पर बीकानेर के डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में भव्य रावण दहन का आयोजन हुआ। सूर्यास्त के साथ रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया गया। इसके बाद रंग-बिरंगी इलेक्ट्रिक आतिशबाजी से आसमान जगमगा उठा। स्टेडियम में मौजूद हजारों लोगों ने जयश्रीराम के जयकारे लगाए। करीब 40 मिनट तक चली आतिशबाजी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही।
बीकानेर दशहरा कमेटी के अनुसार, डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में 85 फीट ऊंचा रावण तथा मेघनाद और कुंभकरण के 75-75 फीट ऊंचे पुतले तैयार किए गए थे। पहले मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन हुआ, इसके बाद रावण को तीर मारकर जलाया गया। आतिशबाजी के दौरान स्टेडियम का आसमान लाल और नीली रोशनी से जगमगा उठा। वहीं, धरणीधर स्टेडियम में 90 फीट ऊंचे रावण का दहन भी आकर्षण का केंद्र रहा।
बीकानेर दशहरा कमेटी के सचिव वीरेंद्र चावला ने बताया कि इस बार इलेक्ट्रिक आतिशबाजी का अंदाज आईपीएल मैचों के दौरान होने वाली आतिशबाजी जैसा रखा गया। आयोजन में जिला प्रशासन और पूर्व राजपरिवार का भी सहयोग रहा।
10 साल से रावण की भूमिका निभा रहे जयप्रकाश व्यास
डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में रावण की भूमिका निभाने वाले जयप्रकाश व्यास पिछले 10 वर्षों से इस आयोजन से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि वे सुबह से शाम तक झांकी में रावण के रूप में नजर आए और इसके बाद मैदान में भी रावण की भूमिका निभाई।
300 से ज्यादा पुलिसकर्मी रहे तैनात
दशहरा आयोजन के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। स्टेडियम के मैदान में केवल आयोजन समिति के सदस्यों को प्रवेश दिया गया। समिति के करीब 80 सदस्यों के साथ 300 से अधिक पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहे। आमजन की सुरक्षा के लिए मैदान के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई, ताकि दर्शक निर्धारित स्थानों से ही रावण दहन देख सकें।
25 साल से बीकानेर आ रहा सलीम का परिवार
रावण सहित तीनों पुतलों को बनाने और खड़ा करने में उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी सलीम का परिवार पिछले सवा महीने से जुटा हुआ था। सलीम ने बताया कि परिवार का हर सदस्य पुतले बनाने के काम में सहयोग करता है। उन्होंने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से बीकानेर में रावण बनाने के लिए आ रहे हैं। पहले उनके पिता यह काम करते थे और अब वे स्वयं इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
Join for Latest News
हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ