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सरकार ने कसा शिकंजा : अब सोशल मीडिया पर ये गलती पढ़ेगी भारी, लगेगा भारी भरकम जुर्माना

Bansal sadi
6 months ago
सरकार ने कसा शिकंजा : अब सोशल मीडिया पर ये गलती पढ़ेगी भारी, लगेगा भारी भरकम जुर्माना

सरकार ने कसा शिकंजा : अब सोशल मीडिया पर ये गलती पढ़ेगी भारी, लगेगा भारी भरकम जुर्माना

जयपुर। कभी किसी नेताजी का नकली बयान वायरल हो जाता है तो कभी किसी का डीपफेक वीडियो सामने आ जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बने फेक वीडियो, फोटो और ऑडियो पर ऐसा खतरनाक शिकंजा कसा है कि अब सोशल मीडिया पर कोई भी गलती जीवनभर पछतावे का सबब बन सकती है। बिना लेबल के AI कंटेंट पोस्ट करना अब सीधा अपराध घोषित होगा। नियम तोड़ने पर भारी-भरकम जुर्माना, बार-बार चेतावनी और कोर्ट-कचहरी तक का सामना करना पड़ेगा। डीपफेक से फैल रही अफवाहें और सामाजिक अराजकता को कुचलने के लिए Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) ने यह कदम उठाया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह डिजिटल भारत को बचाने का सबसे बड़ा हथियार है, लेकिन क्रिएटर्स और आम यूजर्स को अब बहुत सतर्क रहना होगा। डीपफेक की दुनिया अब खतरे में है

प्लेटफॉर्म्स की भी शामत
प्लेटफॉर्म्स ने फेक कंटेंट नहीं हटाया तो उनकी कानूनी ढाल (सेफ हार्बर) हमेशा के लिए छिन जाएगी। यूजर्स को अब हर पोस्ट अपलोड करते वक्त कसम खानी पड़ेगी कि कंटेंट AI से बना है या नहीं। ये नियम तुरंत लागू हो चुके हैं और 20 फरवरी से तो और भी सख्ती शुरू होगी।

ये हैं नए नियम

लेबलिंग अनिवार्य: लेबल नहीं तो जेल AI से बने कंटेंट का कम से कम 10% हिस्सा साफ वॉटरमार्क या लेबल से चिह्नित करना जरूरी। बिना टैग पोस्ट किया तो सीधे जुर्माना और मुकदमा होगा।

भ्रामक कंटेंट पर तुरंत एक्शन: डीपफेक की शिकायत आई तो कंटेंट 3 घंटे में हटाना होगा (पहले 36 घंटे थे)। देरी हुई तो प्लेटफॉर्म पर लगेगी पेनाल्टी।

यूजर को हर 3 महीने चेतावनी: अपलोड करते वक्त AI कंटेंट की घोषणा जरूरी। प्लेटफॉर्म हर तिमाही यूजर्स को नियमों की याद दिलाएगा, नहीं तो पेनाल्टी डबल।

जीरो टॉलरेंस वाले मामले: बच्चों से जुड़ा गंदा कंटेंट, बिना इजाजत निजी फोटो-वीडियो, फर्जी डॉक्यूमेंट या हिंसा भड़काने वाला AI कंटेंट – तुरंत ब्लॉक, कोई बहाना नहीं चलेगा।प्लेटफॉर्म्स की छूट खत्म

प्लेटफॉर्म्स पर सख्त कार्रवाई: बार-बार गलती करने पर फेसबुक, यूट्यूब, X जैसी कंपनियों की कानूनी सुरक्षा समाप्त। अब वे भी सीधे मुकदमों में फंसेंगी।

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