फर्जी हस्ताक्षर कर जमीन बेचने का आरोप: आठ नामजद सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज
फर्जी हस्ताक्षर कर जमीन बेचने का आरोप: आठ नामजद सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज
बज्जू। क्षेत्र में कृषि भूमि के कथित फर्जी वसीयतनामे के आधार पर नामांतरण करवाने और बाद में जमीन बेचने का मामला सामने आया है। इस संबंध में बीकानेर निवासी लक्ष्मी देवी ने न्यायालय सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, बज्जू में परिवाद पेश किया। परिवाद के आधार पर बज्जू पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अनुसंधान सहायक उपनिरीक्षक झंवरलाल को सौंपा गया है।
परिवाद के अनुसार, परिवादिनी के पिता स्वर्गीय गोरधन पुत्र रतनलाल के नाम ग्राम 17 आरडीवाई, पटवार हल्का रणजीतपुरा, तहसील बज्जू क्षेत्र में स्थित मुरब्बा संख्या 118/55 एवं 118/63 की कुल 12.6450 हेक्टेयर कृषि भूमि गैर खातेदारी आवंटन के तहत दर्ज थी। परिवादिनी के पिता का निधन 19 फरवरी 2020 को हो गया था। आरोप है कि इसके बाद उक्त भूमि को लेकर कथित रूप से फर्जी एवं कूटरचित वसीयतनामा तैयार किया गया, जिस पर मृतक के फर्जी हस्ताक्षर किए जाने का आरोप लगाया गया है।
नामांतरण और जमीन बेचने पर उठाए सवाल
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि हरि सिंह ने कथित वसीयतनामे के आधार पर भूमि का नामांतरण अपने नाम करवाने का प्रयास किया। परिवादिनी के अनुसार, इस संबंध में राजस्व विभाग में आपत्तियां भी प्रस्तुत की गई थीं। बाद में वारिसों के नाम विरासत का नामांतरण दर्ज होने के बावजूद उसे निरस्त किए जाने तथा पुन: वसीयतनामे के आधार पर नामांतरण करवाने पर सवाल उठाए गए हैं।
परिवादिनी ने आरोप लगाया कि कथित वसीयतनामे के आधार पर नामांतरण संख्या 69 दिनांक 19 अगस्त 2025 को हरि सिंह के नाम दर्ज करवाया गया। इसके बाद 1 सितंबर 2025 को नामांतरण संख्या 70 के माध्यम से उक्त कृषि भूमि रामदेव सिंह को बेचे जाने का आरोप है।
मिलीभगत और कूटरचित दस्तावेजों का आरोप
परिवाद में कई व्यक्तियों पर कथित रूप से मिलीभगत करने, फर्जी दस्तावेज तैयार करवाने और उनका इस्तेमाल कर अनुचित लाभ प्राप्त करने के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड में कार्रवाई के दौरान वसीयतनामे की जांच, दस्तावेजों की ऑनलाइन स्कैनिंग और सभी कानूनी वारिसों के बयान लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।
परिवादिनी के अनुसार, उसने इस मामले में पहले पुलिस थाना बज्जू में शिकायत दी थी। कार्रवाई नहीं होने पर 16 सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक, बीकानेर को रजिस्टर्ड डाक से परिवाद भेजा गया। इसके बाद 29 सितंबर 2026 को न्यायालय में परिवाद पेश कर मामला दर्ज कर जांच करने के निर्देश देने की मांग की गई।
पुलिस ने परिवाद के आधार पर एफआईआर दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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