चुनाव पर होंगे मेले और त्यौंहार ऐेसे में तारीखों को फिर से किया परीक्षण
खुलासा न्यूज,बीकानेर। राजस्थान में अगस्त-सितम्बर 2026 में प्रस्तावित नगर निकाय आम चुनाव की मतदान तिथियों में बदलाव की मांग उठने लगी है। जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं वर्षों से पार्टी के निर्वाचन प्रतिनिधि प्रहलादसिंह मार्शल ने इस संबंध में कलेक्टर एवं राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त को पत्र लिखकर प्रमुख धार्मिक पर्वों, मेलों और पदयात्राओं की तिथियों को ध्यान में रखते हुए मतदान कार्यक्रम का पुन: परीक्षण कर मतदान तिथियों में परिवर्तन किए जाने का आग्रह किया है।
मार्शल ने पत्र में कहा कि श्रावण एवं भाद्रपद मास के दौरान राजस्थान के विभिन्न जिलों में अनेक प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशाल मेलों, पदयात्राओं और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इनमें राजस्थान के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसी अवधि में रक्षाबंधन, बारह वफात, सिंजारा (धमोली), श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और संवत्सरी जैसे प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक पर्व भी आते हैं। इसके साथ ही रूणिचा मेला, पुनरासर, कोड़मदेसर सहित अनेक स्थानों पर मेला भरता है। जिसमें बीकानेर सहित आसपास के लोग बड़ी संख्या में पैदल भी जाते है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि नगर निकाय चुनाव की मतदान तिथियां इन पर्वों और धार्मिक आयोजनों के आसपास निर्धारित रहती हैं तो बड़ी संख्या में मतदाता अपने धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में व्यस्त रह सकते हैं, जिससे मतदान प्रतिशत प्रभावित हो सकता है।
पत्र में विशेष रूप से बीकानेर एवं आसपास के क्षेत्रों में होने वाले प्रमुख मेलों का उल्लेख किया गया है। इनमें रामदेवरा मेला, कोडमदेसर भैरूनाथ जी मेला, सियाणा भैरूनाथ जी मेला, पुनरासर हनुमान जी मेला, सालासर बालाजी मेला, सरदारशहर इच्छापूर्ण बालाजी मेला, नागौर बुटाटी धाम मेला, मेड़ता मीरा बाईसा मेला, जोधपुर हरिहर मंदिर मेला, ओसियां सच्चियाय माता मेला, सूर्य मंदिर के धार्मिक आयोजन, बाड़मेर किराडू मंदिर मेला तथा सरदारशहर और सालासर अंजनी माता मंदिर के मेले शामिल हैं।
मार्शल ने कहा कि चूरू, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर सहित अन्य जिलों में भी धार्मिक स्थलों पर बड़े स्तर पर मेले और आयोजन होते हैं, जिनमें हजारों-लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव और धार्मिक आयोजनों की तिथियां एक-दूसरे के आसपास होने से केवल मतदाताओं को ही नहीं, बल्कि चुनाव ड्यूटी में नियुक्त कार्मिकों तथा कानून-व्यवस्था संभालने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को भी व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
मार्शल ने कलेक्टर व राज्य निर्वाचन आयुक्त से मांग की है कि नगर निकाय आम चुनाव अगस्त-सितम्बर 2026 की प्रस्तावित मतदान तिथियों का पुन: परीक्षण करवाकर प्रमुख धार्मिक पर्वों, मेलों एवं पदयात्राओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बदलाव किए जाएं। उन्होंने कहा कि इससे अधिक से अधिक मतदाता सुविधापूर्वक अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे और स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने जनहित और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी को ध्यान में रखते हुए मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
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