चुनावों में इन दो वार्डों की रही सबसे ज्यादा चर्चा, इन वार्डों में ये नजर आए मजबूत
चुनावों में इन दो वार्डों की रही सबसे ज्यादा चर्चा, इन वार्डों में ये नजर आए मजबूत
बीकानेर। नगर निगम चुनाव को लेकर मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब सबकी निगाहे 14 सितंबर को होने वाली मतगणना पर टिक गई है। इसी बीच खुलासा की टीम ने हर वार्ड में पहुंचकर लोगों से बातचीत की और पल पल की अपडेट भी आपके साथ साझा की। खुलासा टीम की इस पूरी कवरेज के दौरान 13 और 73 वार्ड की चर्चा सबसे ज्यादा रही। इन दोनों ही वार्डों की जानकारी के लिए हर कोई उत्साहित नजर आया है। हर किसी का ये ही सवाल था इन दोनों वार्डों में आपको क्या लग रहा है। इसी दौरान पूर्व महापौर के वार्ड की भी चर्चा हुई। इसके बाद वार्ड 54 काफी चर्चा में रहा। क्योंकि यहां से भाजपा से बागी हुए तरुण यादव चुनाव लड़ रहे हैं। तरुण यादव काफी मजबूत नजर आ रहे थे तो वहीं भाजपा बिल्कुल भी सक्रिय नजर नहीं आई। वार्ड 54 यहां मुकाबला कांग्रेस और तरुण यादव निर्दलीय प्रत्याशी में ही देखा गया।
वार्ड 4 में विनोद सुथार की पत्नी कांता सुथार निर्दलीय चुनाव लड़ रही है । यहां पर भी निर्दलीय प्रत्याशी कांता सुधार दोनों ही पार्टियों को मजबूती से टक्कर दे रही है और कहीं ना कहीं यहां निर्दलीय प्रत्याशी जीतने की संभावनाएं सबसे ज्यादा है। क्योंकि सुथार समाज के साथ सामान्य के वार्ड से ओबीसी के प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे। जब दोनों ही पार्टियों ने यहां से ओबीसी प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे तब विनोद सुथार ने सहमति से अपनी पत्नी कांता सुथार को चुनाव लड़ाने का फैसला किया। वार्ड 50 से भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं मोंटी मक्कर भी पहले भाजपा से टिकट मांग रहे थे लेकिन पार्टी ने उनका टिकट नहीं दी यहां पर भी पंजाबी खत्री समाज के वोट अधिक हैं अगर यहां वोटो का नुकसान होगा तो भाजपा को ज्यादा होगा। चुनाव अभियान में टिकट की घोषणा से पहले ही मोंटी काफी सक्रिय हो गए थे।
वार्ड 66 भी काफी रोमांचक रहा क्योंकि यहां से पूर्व भाजपा प्रत्याशी श्याम मोदी की माता को टिकट मिला। भाजपा से प्रताप सिंह बडगूजर भी अपनी पत्नी के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन भाजपा ने एक बार पुणे श्याम मोदी पर भरोसा जताया और उन्हें टिकट दे दी। टिकट नहीं मिलने से संजना ने निर्दलीय चुनाव की ताल ठोक दी जिसकी वजह से यहां वार्ड में त्रिकोणीय संघर्ष बन गया है। हम बात करें एक ओर वार्ड की तो यहां से कांग्रेस के गुलाम मुस्तफा की पुत्रवधू चुनाव लड़ रही है। गुलाम मुस्तफा के लिए भी यह चुनाव बहुत अहम है क्योंकि कांग्रेस का बड़ा चेहरा माना जाता है। लेकिन अगर थोड़ी भी बगावत यहां दोनों ही पार्टियों में नजर आई तो यहां पर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीत सकती है। खैर अब यह तो आने वाली 14 तारीख ही बताएगी कि चुनाव कौन जीतेगा।
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