क्या आपके फोन में भी अचानक बजी घंटी? जाने क्या है NDMA का इमरजेंसी अलर्ट टेस्ट
क्या आपके फोन में भी अचानक बजी घंटी? जाने क्या है NDMA का इमरजेंसी अलर्ट टेस्ट
नई दिल्ली। शनिवार सुबह ठीक 11:45 बजे देशभर में करोड़ों मोबाइल फोन पर एक साथ तेज सायरन की आवाज सुनाई दी। अचानक आई इस आवाज और स्क्रीन पर दिखे हिंदी-अंग्रेजी मैसेज से कई लोग घबरा गए, तो कई लोग कन्फ्यूज हो गए। सायरन बंद होने के बाद मोबाइल ने उस मैसेज को पढ़कर भी सुनाया, जिससे लोगों की जिज्ञासा और बढ़ गई। हालांकि बाद में साफ किया गया कि यह कोई असली खतरा नहीं था, बल्कि एक परीक्षण (ट्रायल) था।
यह अलर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा भेजा गया था, जो इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट सिस्टम की जांच का हिस्सा था। सरकार ने 2 मई 2026 को पूरे देश में सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम का व्यापक परीक्षण किया, ताकि भविष्य में किसी भी आपदा के दौरान लोगों तक तुरंत और सटीक जानकारी पहुंचाई जा सके।
एक साथ करोड़ों मोबाइल पर पहुंचा मैसेज
इस परीक्षण के तहत देश के सभी राज्यों की राजधानियों और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक साथ मोबाइल अलर्ट भेजा गया। यह मैसेज हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी था, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे समझ सकें। मैसेज में साफ लिखा था कि यह केवल एक परीक्षण है और किसी तरह की कार्रवाई की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद अचानक आए इस अलर्ट से कई लोग असहज महसूस करने लगे।
पहले ही दी गई थी सूचना
सरकार ने इस परीक्षण से दो दिन पहले ही नागरिकों को सूचना दे दी थी कि उन्हें एक टेस्ट मैसेज मिलेगा और इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद जब मोबाइल पर तेज सायरन और वाइब्रेशन हुआ, तो कई लोग इसे असली इमरजेंसी समझ बैठे।
‘SACHET’ सिस्टम क्या है?
इमरजेंसी के समय रियल टाइम अलर्ट देने के लिए C-DOT द्वारा ‘SACHET’ नाम का एक इंटीग्रेटेड अलर्ट सिस्टम विकसित किया गया है। यह सिस्टम कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है और इसे देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा चुका है। इस सिस्टम का मकसद है कि किसी भी प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदा—जैसे भूकंप, बाढ़, चक्रवात या अन्य खतरे—के समय लोगों को तुरंत चेतावनी मिल सके।
सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक कैसे काम करती है?
इस अलर्ट सिस्टम में पारंपरिक SMS की जगह सेल ब्रॉडकास्ट (CB) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे किसी विशेष क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल फोन पर एक साथ मैसेज भेजा जा सकता है, चाहे नेटवर्क व्यस्त क्यों न हो। इस तकनीक की खास बात यह है कि यह रियल टाइम में सूचना पहुंचाती है और इसके लिए मोबाइल नंबरों का अलग से डेटाबेस रखने की जरूरत नहीं होती।
अब तक करोड़ों अलर्ट भेजे जा चुके
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस सिस्टम के जरिए अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से ज्यादा अलर्ट संदेश भेजे जा चुके हैं। इनका उपयोग मौसम बदलाव, चक्रवात और अन्य आपदाओं की चेतावनी देने के लिए किया गया है।
क्यों जरूरी है यह सिस्टम
भारत जैसे बड़े और विविध भौगोलिक देश में आपदाएं अक्सर अचानक आती हैं। ऐसे में समय पर चेतावनी मिलना जीवन बचाने के लिए बेहद जरूरी होता है।
यह सिस्टम—
लोगों को समय रहते सतर्क करेगा
अफवाहों को रोकने में मदद करेगा
प्रशासन और जनता के बीच बेहतर तालमेल बनाएगा
नुकसान को कम करने में मदद करेगा
शनिवार को किया गया यह राष्ट्रव्यापी परीक्षण भारत की आपदा प्रबंधन तैयारियों की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि अचानक आए अलर्ट से लोग कुछ देर के लिए घबरा गए, लेकिन यह भविष्य के लिए एक जरूरी अभ्यास था। सरकार का उद्देश्य साफ है—आपदा के समय हर नागरिक तक सही सूचना सही समय पर पहुंचे, ताकि जान-माल का नुकसान कम से कम हो सके।
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