इस आरक्षण संशोधन ड्राफ्ट को केंद्र की मंजूरी, इसी महीने पारित होने की संभावना; मोदी बोले - यह भारत की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों की झलक
इस आरक्षण संशोधन ड्राफ्ट को केंद्र की मंजूरी, इसी महीने पारित होने की संभावना; मोदी बोले - यह भारत की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों की झलक
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
सरकार ने बजट सत्र को बढ़ाते हुए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें इस संशोधन बिल को पारित किए जाने की संभावना है। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा, और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा।
प्रस्ताव के मुताबिक आरक्षण ‘वर्टिकल’ आधार पर लागू होगा, यानी अनुसूचित जाति और जनजाति की आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए हिस्सा तय किया जाएगा।
इस बिल को लेकर पीएम मोदी ने अपनी वेबसाइट पर एक आर्टिकल पब्लिश किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि महिला रिजर्वेशन एक्ट में प्रस्तावित बदलाव सिर्फ एक कानूनी काम नहीं, बल्कि यह पूरे भारत की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों की झलक है।
उन्होंने सभी सांसदों से इस कदम का साथ देने के लिए एक साथ आने की अपील की और कहा- संसद, सभी दलों से ऊपर उठकर, भारत की महिलाओं के लिए इस महत्वपूर्ण कदम के समर्थन में एकजुट हो।
मोदी का आर्टिकल 5 पॉइंट्स में …
पिछले कई दशकों में लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं को उनका उचित स्थान दिलाने के लिए बार-बार प्रयास हुए हैं। समितियां गठित की गईं, विधेयकों के मसौदे प्रस्तुत किए गए, लेकिन वे कभी पारित नहीं हो सके।
यह एक ऐसा पल है जिसे अब और नहीं टाला जा सकता। महिलाओं के रिप्रेजेंटेशन को आगे बढ़ाने में हर देरी, असल में, हमारे लोकतंत्र की क्वालिटी और सबको साथ लेकर चलने को मजबूत करने में देरी है।
अगर अब भी हम इसे आगे टालते हैं, तो उसका अर्थ यही होगा कि हम उस असंतुलन को और लंबा खींच रहे हैं, जिसे हम पहचानते भी हैं और सुधारने की क्षमता भी रखते हैं।
महिला आरक्षण बिल को पारित कराने के लिए सहमति बहुत जरूरी है। इसे बड़े राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिए। ऐसे अवसर हमें यह याद दिलाते हैं कि कुछ फैसले अपने समय से बड़े होते हैं। वे आने वाली पीढ़ियों की दिशा तय करते हैं।
भारत ने हमेशा दिखाया है जब राष्ट्रीय महत्व की बात आती है, तो वह मतभेदों से ऊपर उठकर एकता के साथ काम कर सकता है। यह भी ऐसा ही एक क्षण है।
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