बीकानेर: इस चुनाव में भी ये ही मुद्दा टूटी सड़के, सड़ांध मारते जाम सीवरेज
बीकानेर: इस चुनाव में भी ये ही मुद्दा टूटी सड़के, सड़ांध मारते जाम सीवरेज
बीकानेर। नगर निगम चुनाव को लेकर प्रचार प्रसार तेजी से चल रहा है। लेकिन शहर की जो स्थिति वो किसी से छुपी नहीं है। इतना ही नहीं जहां पार्टियों के कार्यालय बने है उनके सामने भी सीवरेज जाम और टूटी सड़कों जैसी स्थिति है। ऐसे में लोगों का ये ही कहना है एक बार फिर चुनाव आया है और मुद्दा फिर वो ही लाया है। यानी टूटी सड़के, सड़ांध मारते जाम सीवरेज, जगह-जगह पड़ा कचरा हर जगह पड़ा ही नजर आता है। बीकानेर की सड़कों पर नजर डालें तो कई इलाकों में टूटी सड़कें और गड्ढे आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। कहीं सड़क की हालत खराब है तो कहीं लंबे समय से मरम्मत का इंतजार है। बारिश या सीवरेज का पानी जमा होने के बाद इन सड़कों की स्थिति और भी खराब हो जाती है। वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। मुख्यमंत्री के बीकानेर में रोड शो से पहले कुछ जगह फिर से लीपा पोती की गई थी।
शहर की एक बड़ी समस्या जाम सीवरेज भी है। कई क्षेत्रों में सीवरेज लाइन जाम होने से गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है। इससे आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध का माहौल बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। कुछ जगहों पर सीवरेज का पानी सड़क पर जमा रहने से आवाजाही प्रभावित होती है, वहीं दुकानदारों और आसपास रहने वाले लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। खास बात यह है कि चुनावी माहौल में राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों ने अपने कार्यालय शहर के अलग-अलग हिस्सों में बनाए हैं। लेकिन कई स्थानों पर इन कार्यालयों के आसपास भी वही समस्याएं नजर आ रही हैं, जिनका समाधान कराने के वादे चुनाव के दौरान किए जाते हैं। कहीं टूटी सड़क दिखाई देती है तो कहीं सीवरेज जाम होने से गंदा पानी और दुर्गंध लोगों का ध्यान खींचती है। ऐसे में आम लोगों के बीच यह चर्चा है कि जब राजनीतिक दलों के कार्यालयों के सामने ही शहर की मूलभूत समस्याएं मौजूद हैं तो बाकी इलाकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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