भारतवंशी नवनीतम ‘नवी’ पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार, छठवीं बार किसी भारतवंशी को नोबेल पुरस्कार
भारतवंशी नवनीतम ‘नवी’ पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार, छठवीं बार किसी भारतवंशी को नोबेल पुरस्कार
नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं भारतीय मूल की प्रख्यात न्यायविद् नवनीतम ‘नवी’ पिल्लै को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। नॉर्वे की नोबेल समिति ने उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के प्रयासों के लिए इस सम्मान के लिए चुना है। पिल्लै ने रंगभेद के दौर में दक्षिण अफ्रीका में मानवाधिकारों और समानता के लिए काम किया। उन्होंने नेल्सन मंडेला सहित रंगभेद विरोधी आंदोलन से जुड़े लोगों का बचाव भी किया था। अपने लंबे कानूनी करियर में उन्होंने युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के लिए मिला सम्मान
नोबेल समिति के अनुसार, बढ़ते युद्धों और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच कानून के शासन को बनाए रखना शांति के लिए बेहद जरूरी है। पिल्लै ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं में काम करते हुए युद्ध अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों में जवाबदेही तय करने में भूमिका निभाई है। वे दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में न्यायाधीश रहीं। इसके अलावा उन्होंने रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में भी न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2008 से 2014 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया।
पुरस्कार की घोषणा के समय पिल्लै जर्मनी के नूर्नबर्ग में एक कानूनी सम्मेलन में मौजूद थीं। नूर्नबर्ग द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नाजी नेताओं के खिलाफ चले ऐतिहासिक युद्ध अपराध मुकदमों के लिए जाना जाता है। ऐसे स्थान पर पुरस्कार की घोषणा को अंतरराष्ट्रीय न्याय और कानून के महत्व के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। नोबेल शांति पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया जाएगा। पिल्लै का चयन ऐसे समय हुआ है, जब अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों से जुड़ी संस्थाओं की भूमिका पर दुनिया भर में बहस जारी है।
नवी पिल्लै का सम्मान अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था को मजबूत करने और युद्ध तथा हिंसा के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों को वैश्विक पहचान देता है।
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