क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया : विपक्ष ला सकता है अविश्वास प्रस्ताव
क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया : विपक्ष ला सकता है अविश्वास प्रस्ताव
लोकसभा में बजट सत्र की शुरुआत से लेकर अब तक सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। खासकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तरफ से भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब से जुड़े संदर्भ पेश करने की मांग के बाद से।
विपक्ष ने स्पीकर के उस बयान पर आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि महिला सांसद प्रधानमंत्री पर हमले की योजना बना रही थीं। विपक्ष ने इस आरोप को निराधार बताते हुए स्पीकर से इस पर स्पष्टीकरण और सबूत की मांग की है।
क्या लोकसभा अध्यक्ष को हटाया जा सकता है, आखिर कैसे?
भारतीय संविधान में लोकसभा स्पीकर (अध्यक्ष) को हटाने की प्रक्रिया है। इसे तकनीकी रूप से 'महाभियोग' नहीं कहा जाता। संविधान में स्पीकर को हटाने का जिक्र अनुच्छेद 94(सी) के तहत दिया गया है। इसमें कहा गया है कि स्पीकर को लोकसभा के प्रस्ताव के जरिए हटाया जा सकता है।
क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया?
14 दिनों का नोटिस: स्पीकर को हटाने के लिए लिखित नोटिस दिया जाना जरूरी है। वह भी कम से कम प्रक्रिया शुरू करने से 14 दिन पहले। इसी के साथ ऐसे किसी भी प्रस्ताव के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
सदन की अध्यक्षता: जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर सदन में चर्चा या बहस हो रही होती है, तब स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते। इस दौरान डिप्टी स्पीकर या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त कोई अन्य सदस्य सदन की कार्यवाही का संचालन करता है।
मतदान की प्रक्रिया: स्पीकर को हटाने के लिए सदन के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत की जरूरत होती है। सीधे शब्दों में यह सामान्य अविश्वास प्रस्ताव से अलग है, क्योंकि इसमें केवल सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों का बहुमत पर्याप्त नहीं होता। सभी सदस्यों की मौजूदगी और उनका मतदान करना जरूरी होता है।
इसे एक उदाहरण से समझें, अगर सदन की कुल सदस्य संख्या 543 है, तो स्पीकर को हटाने के लिए कम से कम 272 वोटों की जरूरत होगी, चाहे सदन में कितने भी सदस्य गैरमौजूद हों या मतदान में हिस्सा न ले रहे हों।
प्रस्ताव पारित होने का असर: अगर लोकसभा में यह प्रस्ताव बहुमत से पारित हो जाता है, तो स्पीकर को तत्काल प्रभाव से पद छोड़ना पड़ता है। इसके साथ ही सदन को नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करनी होती है।
चूंकि लोकसभा स्पीकर मुख्यतः उसी दल की तरफ से चुना जाता है, जो सत्ता में होता है, ऐसे में अगर स्पीकर को हटाने के लिए जरूरी वोट मिल जाते हैं तो यह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के तौर पर देखा जाता है। इसका मतलब है कि सत्तापक्ष लोकसभा में बहुमत खो चुका है और उसके पास सरकार में रहने के लिए जरूरी 272 सदस्यों का समर्थन नहीं है। ऐसे में विपक्ष मौके पर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी ला सकता है।