शिक्षा विभाग की नियमावली में ही लूट की राह,सरकारी की बजाए निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने पर जोर दे रहे
शिक्षा विभाग की नियमावली में ही लूट की राह,सरकारी की बजाए निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने पर जोर दे रहे
बीकानेर। शिक्षा निदेशक जिन नियमों का हवाला देते हैं उन्हीं नियमों की शब्दावली में छिपा एक शब्द विवेकानुसार आज प्रदेश के लाखों अभिभावकों की जेब पर डकैती का कानूनी जरिया बन गया है। पाठ्यक्रम तो एनसीईआरटी का है, लेकिन किताबों के ब्रांड चुनने की इस विवेकीय आजादी ने निजी स्कूलों को प्राइवेट प्रकाशकों का एजेंट बना दिया है। नतीजा यह है कि 60 फीसदी तक के भारी-भरकम कमीशन के चक्कर में 200 का बुक-सेट 4000 में बेचा जा रहा है और विभाग स्पष्ट निर्देशों के अभाव में हाथ पर हाथ धरे बैठा है।राज्य सरकार द्वारा शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के माध्यम से सरकारी एवं निजी स्कूलों में एक समान यूनिफॉर्म लागू करने के प्रस्ताव पर संयुक्त अभिभावक संघ ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार शिक्षा में वास्तविक सुधार के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाकर ड्रेस कोड थोपने में लगी हुई है, जबकि प्रदेशभर के अभिभावक निजी स्कूलों की मनमानी पाठ्य पुस्तकों की खरीद-फरोख्त से त्रस्त हैं।संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि आज प्रदेश में सबसे बड़ा आर्थिक बोझ यूनिफॉर्म नहीं, बल्कि निजी स्कूलों द्वारा अनिवार्य रूप से थोपी जा रही महंगी और अनावश्यक पाठ्य पुस्तकों का है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग अभिभावकों के सब्र की परीक्षा बिल्कुल न लें। अभिभावक तब तक शांत हैं, जब तक वे बिखरे हुए हैं, लेकिन अब अभिभावक न केवल जागरूक हो रहे हैं बल्कि मुखर भी हो रहे हैं। सरकार और विभाग समय रहते चेत जाएं, अन्यथा गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।यूं समझें क्या है नियम और कहां है खामीनिजी स्कूल को जिस बोर्ड या मंडल से मान्यता प्राप्त है उसे बोर्ड या मंडल द्वारा निर्धारित मान्यता नियम और निर्देशों, मापदंडों तथा अधिनियमों का पालन करना उस निजी स्कूल के लिए अनिवार्य होगा।निजी विद्यालय अपने विवेकानुसार (इसी विवेक का लाभ लूट के लिए हो रहा है) एनसीईआरटी, राजस्थान पाठ्य पुस्तक मंडल, प्रारंभिक शिक्षा बोर्ड व निजी प्रकाशकों द्वारा पाठ्यक्रम के अनुसार प्रकाशित पाठ्य पुस्तकों में से विद्यार्थियों के शिक्षण के लिए पुस्तकों का चयन कर सकेंगे।निजी स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा कि वह शिक्षण सत्र शुरू होने से एक माह पूर्व पुस्तकों की सूची, लेखक एवं प्रकाशक का नाम तथा मूल्य के साथ अपने विद्यालय के सूचना पटल वह अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करें।
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