Khulasa Online
Breaking
• राजस्थान में सस्ती बिजली पर संकट: सोलर ओवरफ्लो से लाखों यूनिट बिजली बेकार • बड़ी खबर: बिल्डिंग में लगी भीषण आग, नौ लोगो की मौत,कुछ के सिर्फ कंकाल मिले • हादसा: तेज आंधी में डूबा क्रूज, 9 की मौत, कई अब भी लापता • बीकानेर में दर्दनाक हादसा: पशु से टकराई बाइक, युवक की मौत • निगहबानी के साथ आत्मनिर्भरता भी : ऐसी एंटी शिप मिसाइल बना रहा भारत, जिसकी रफ्तार जानकर दुश्मन रह जाएंगे हैरान! • राजस्थान में सस्ती बिजली पर संकट: सोलर ओवरफ्लो से लाखों यूनिट बिजली बेकार • बड़ी खबर: बिल्डिंग में लगी भीषण आग, नौ लोगो की मौत,कुछ के सिर्फ कंकाल मिले • हादसा: तेज आंधी में डूबा क्रूज, 9 की मौत, कई अब भी लापता • बीकानेर में दर्दनाक हादसा: पशु से टकराई बाइक, युवक की मौत • निगहबानी के साथ आत्मनिर्भरता भी : ऐसी एंटी शिप मिसाइल बना रहा भारत, जिसकी रफ्तार जानकर दुश्मन रह जाएंगे हैरान!
Arham School
jeevan raksha
Sambhav Hospital
Bansal Group
Bharti
Trade Fair

पशुधन के लिए पर्याप्त मात्रा में चारे के लिए आधुनिक तकनीक के साथ बढ़ानी होगी जनभागीदारी, पढ़ें खबर

rk
6 hours ago
पशुधन के लिए पर्याप्त मात्रा में चारे के लिए आधुनिक तकनीक के साथ बढ़ानी होगी जनभागीदारी, पढ़ें खबर

खुलासा न्यूज,बीकानेर। पशुधन के लिए पौष्टिक व पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पारम्परिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक का सामंजस्य करते हुए जनभागीदारी बढानी  होगी।   एसकेआरएयू वीसी सभागार में बुधवार को चारा प्रबंधन पर आयोजित चर्चा में यह विचार सामने आए। केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की प्रेरणा से आयोजित की गई इस चर्चा में राजुवास के कुलगुरु डॉ सुमंत व्यास,  भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (आईजीएफआरआई), झांसी के निदेशक डॉ पंकज कौशल सहित आईसीएआर, काजरी तथा राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। अनुसंधान निदेशक एसकेआरएयू डॉ एन के शर्मा ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आधिकारिक तौर पर 2026 को रेंजलैंड और पशुपालकों का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष  घोषित किया है। पश्चिमी राजस्थान में वैस्टलैड की उपलब्धता को देखते हुए  केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पश्चिमी राजस्थान में चारागाह विकास व प्रबंधन को नयी दिशा देने हेतु आपसी समन्वय बढ़ाने के लिए  आईजीएफआरआई काजरी व स्थानीय एजंसियों को   सहयोग के लिए कहा, इसी के तहत यह चर्चा आयोजित की गई।  

 

तकनीक के साथ किसानों की सहभागिता आवश्यक
राजु वास के कुलगुरु डॉ सुमंत व्यास ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान का किसान आत्महत्या नहीं करता इसका बड़ा कारण यहां के किसानों का पशुपालन से जुड़ा होना है। छोटी होती जोत, घटते चारागाह ,  औद्योगीकरण जैसी परिस्थितियों के बीच पशुओं के लिए पौष्टिक चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है। आईसीएआर के सभी संस्थानों को उन्नत किस्म की घासों के पर्याप्त बीज उपलब्ध करवाते हुए किसानों को चारे की पौष्टिक किस्में उगाने के लिए प्रेरित करना होगा। 


डॉ व्यास ने कहा कि वर्षा आधारित ओरण व गोचर  चारा उत्पादन का महत्वपूर्ण पारम्परिक तरीका रहा है। वर्तमान ड्रिप इरिगेशन, हाइड्रोपोनिक्स , साइलेज व अन्य तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जानवरों की चराई से इकोसिस्टम को  संबल मिलता  है। चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों तथा  स्टेक होल्डर्स को मिलकर काम करना होगा।।

 


 भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (आईजीएफआरआई)  के निदेशक डॉ पंकज कौशल ने  उन्नत चारे की किस्मों, उगाने के मॉड्यूल तथा आधुनिक मशीनों के संबंध में विस्तृत प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में वैस्टलैड की व्यापक उपलब्धता है। चारा उगाने में इस भूमि का इस्तेमाल किया जाए।  चारा नीति बना कर रणनीतिक रूप से कार्य करते हुए किसानों को समुचित प्रशिक्षण दें। देश में चारे की कमी को दूर करने के लिए सभी एजेंसियां अपनी क्षेत्रीय आवश्यकताओं को समझते हुए रोड मैप बनाकर  काम करें ।

 

 
सीसीएफ बीकानेर हनुमानराम ने कहा कि कृषि व पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसे में घटते चारागाह चिंता का विषय है।  सेवण तथा धामण पश्चिम राजस्थान की पौष्टिक घास हैं।? इकोसिस्टम को बनाए रखने में भी इन घासों की महत्वपूर्ण भूमिका है।इन घासों के बीज उत्पादन बढ़ाने तथा संरक्षण के लिए आमजन को साथ लेकर काम किया जाए। 
केन्द्रीय उष्ट्र अनुसंधान संस्थान के प्रतिनिधि वैज्ञानिक ने कहा कि  खाद्य सुरक्षा के समान? ही पशुओं के लिए फीड सिक्योरिटी महत्वपूर्ण है।  पशु को हम नहीं बल्कि पशु हमें पाल रहा है,  चारे की पौष्टिकता और उपलब्धता सुनिश्चित करने से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होने में मदद मिलेगी। अनुसंधान निदेशक डॉ एन के शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में चारा उत्पादन,  प्रबंधन के आयामों की जानकारी दी। 

 


बैठक में जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैलेजा पांडे, प्रसार शिक्षा निदेशक एसकेआरएयू डॉ दीपाली धवन,  सेंटर फॉर पॉलिसी डिजाइन अत्री के निदेशक डॉ अबि तमीम, राजु वास के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ आरके धुडिया ,कृषि विभाग के जयदीप दोगने ने एनआरसीसी के  आर के सावल, एन डी यादव, एफ ई एस से डिंपल, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट मुंबई से चेतन मिश्र, शुभम कलवाणी सहित आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों, जिला परिषद, वन विभाग, कृषि  , जलसंरक्षण व अन्य विभाग के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे।

Sanskar
BC

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Share: