'लद्दाख में नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात चाहते थे वांगचुक', केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
'लद्दाख में नेपाल-बांग्लादेश जैसे हालात चाहते थे वांगचुक', केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
नई दिल्ली। केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सोनम वांगचुक लद्दाख में नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि वांगचुक के बयानों से हिंसा भड़कने का खतरा था। सरकार ने आरोप लगाया, 'वांगचुक ने केंद्र सरकार को 'वे' कहकर संबोधित किया, जो अलगाववादी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने जेन जी को गृहयुद्ध और खूनखराबे के लिए उकसाने की कोशिश की।'
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ के सामने सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह दलील दी। यह याचिका वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने दायर की है।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा, 'वह केंद्र सरकार को 'वे' कहते हैं। यह 'हम' और 'वे' ही एनएसए के तहत हिरासत के लिए पर्याप्त है। इस देश में 'हम' और 'वे' नहीं हैं, हम सभी भारतीय हैं।' मेहता ने आरोप लगाया कि वांगचुक लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसी स्थिति में ले जाना चाहते थे और उन्होंने युवाओं को भड़काने के लिए अपने भाषणों में महात्मा गांधी का नाम केवल एक आवरण के रूप में इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा कि कई बार भड़काऊ भाषण दिए जाते हैं, जिनकी शुरुआत और अंत गांधीजी के नाम से किया जाता है, लेकिन बीच में हिंसा भड़काने वाली बातें होती हैं। मेहता ने वांगचुक के भाषणों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने नेपाल और अरब क्रांति का उल्लेख करते हुए आत्मदाह जैसी घटनाओं की बात की, जिससे युवाओं को हिंसा की ओर उकसाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक ने आत्मदाह की धमकी देकर लद्दाख आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय रंग देने की कोशिश की।
केंद्र ने सोनम वांगचुक के बयानों को बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि लद्दाख सीमावर्ती क्षेत्र है और सशस्त्र बलों की आपूर्ति श्रृंखला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक ने क्षेत्र में जनमत संग्रह जैसे विचारों की बात की, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। इससे पहले, पिछली सुनवाई में वांगचुक की ओर से दलील दी गई थी कि सरकार की आलोचना और विरोध करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और इससे राज्य की सुरक्षा को खतरा नहीं होता। मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।
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