ट्रम्प ने ईरान का शांति प्रस्ताव ठुकराया, रखी एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने की शर्त
ट्रम्प ने ईरान का शांति प्रस्ताव ठुकराया, रखी एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने की शर्त
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की ओर से भेजे गए नए शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान का जवाब उन्हें पसंद नहीं आया और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए जवाब को पढ़ा है, लेकिन यह अमेरिका की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान अब भी गंभीरता से बातचीत करने के बजाय समय बिताने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी ट्रम्प प्रशासन ईरान पर कई बार “खेल खेलने” और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करने का आरोप लगा चुका है।
दरअसल, ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार तेहरान ने रविवार को पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में युद्ध समाप्त करने, फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, आर्थिक प्रतिबंध हटाने और परमाणु कार्यक्रम को लेकर नए सिरे से बातचीत शुरू करने की पेशकश की गई थी। ईरान का कहना है कि वह क्षेत्र में स्थिरता चाहता है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने को तैयार है।
हालांकि अमेरिका ने ईरान के सामने काफी कड़ी शर्तें रखी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने इस सप्ताह ईरान को 14 सूत्रीय प्रस्ताव सौंपा था। इसके तहत ईरान को कम से कम 12 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन यानी एनरिचमेंट पूरी तरह रोकना होगा। इसके अलावा ईरान के पास मौजूद लगभग 440 किलो 60 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा। अमेरिका का दावा है कि इतना अधिक संवर्धित यूरेनियम भविष्य में परमाणु हथियार निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, इसलिए इसे नियंत्रण में लेना जरूरी है।
अमेरिका ने बदले में ईरान को कई राहत देने का प्रस्ताव भी रखा है। इनमें आर्थिक प्रतिबंधों में ढील, ईरान की फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करना और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शामिल है। माना जा रहा है कि अमेरिका चाहता है कि ईरान पहले पूरी तरह परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण स्वीकार करे, उसके बाद ही किसी तरह की राहत दी जाएगी।
दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका की इन शर्तों को बेहद कठोर बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका देश अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह समझौता नहीं करेगा। उनका दावा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका इस्तेमाल ऊर्जा तथा वैज्ञानिक शोध के लिए किया जा रहा है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर दबाव में कोई फैसला नहीं करेगा।
ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका को भेजा गया जवाब “सकारात्मक और व्यावहारिक” है। उनके अनुसार अब आगे का फैसला अमेरिका को करना है। हालांकि ट्रम्प के ताजा बयान से साफ संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच समझौते की राह फिलहाल आसान नहीं दिख रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर असर डाल सकता है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा बेहद संवेदनशील माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। यदि यहां किसी तरह का सैन्य संघर्ष बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा।
मध्य पूर्व के कई देशों की नजर भी इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है। सऊदी अरब, इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई है। वहीं रूस और चीन जैसे देश ईरान के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलहाल दोनों देशों ने 8 अप्रैल से लागू संघर्षविराम यानी सीजफायर समाप्त करने की घोषणा नहीं की है, लेकिन हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार यह अपील कर रहा है कि दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकालें ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।
अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि बातचीत आगे नहीं बढ़ती है तो आने वाले दिनों में तनाव और गहरा सकता है, जिसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
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