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कल नौवीं बार बजट पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, 75 साल की बजट परंपरा बदलेंगी

3 weeks ago
कल नौवीं बार बजट पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, 75 साल की बजट परंपरा बदलेंगी

कल नौवीं बार बजट पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, 75 साल की बजट परंपरा बदलेंगी

नई दिल्ली । एक फरवरी को संसद में पेश किए जाने वाले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 75 साल पुरानी परंपरा को तोड़ सकती हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार अपने बजट भाषण के भाग-बी (Part B) में भारत की इकोनॉमी के भविष्य को लेकर विस्तृत विजन पेश कर सकती हैं। अब तक के केंद्रीय बजटों में अधिकांश अहम बातें भाग-ए (Part A) में होती थीं जबकि भाग-बी आमतौर पर टैक्स और नीतिगत घोषणाओं तक सीमित रहता था।

एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस बार के बजट के भाग-बी में सरकार की शॉर्ट टर्म प्रायोरिटीज और लॉन्ग टर्म के टारगेट दोनों को सामने रखा जा सकता है। इसमें 21वीं सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहे भारत की लोकल स्ट्रेंग्थ और ग्लोबल एंबीशंस पर जोर दिया जाएगा।

भारत और विदेशों के अर्थशास्त्री इस बजट पर खास नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसमें सिर्फ टैक्स बदलाव नहीं, बल्कि देश की आर्थिक दिशा का एक व्यापक रोडमैप सामने आने की उम्मीद है।

नौवीं बार बजट पेश करेंगी सीतारमण

यह सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा। उन्होंने 2019 में अपने पहले बजट में दशकों से बजट दस्तावेजों को ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले चमड़े के ब्रीफकेस को लाल कपड़े में लिपटे पारंपरिक 'बही-खाता' से बदल दिया था। इस वर्ष का बजट पिछले चार वर्षों की तरह ही पेपरलेस होगा।

वित्त वर्ष 2026 में GDP के 4.5 फीसदी कम घाटे के साथ राजकोषीय कंसोलिडेशन का रोडमैप हासिल करने के बाद, बाजार वित्त वर्ष 2027 के बजट में डेब्ट टु GDP रेशो में कमी की दिशा पर नजर रखेंगे। वे यह भी देखेंगे कि क्या सरकार अगले वित्तीय वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का कोई विशिष्ट आंकड़ा प्रदान करेगी।

इस वित्तीय वर्ष के लिए सरकार का प्लांड कैपिटल एक्सपेंडिचर 11.2 लाख करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है। निजी क्षेत्र के खिलाड़ियों की सतर्कता को देखते हुए, सरकार नवीनतम बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर पर अपना ध्यान केंद्रित रख सकती है। कैपिटल एक्सपेंडिचरी में वर्तमान स्तर से 10-15 फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी।

VB G RAM G जी जैसी प्रमुख योजनाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर होने वाले खर्च पर भी विशेष नजर रहेगी।

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