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सावा संस्कृति का प्रसार प्रचार कर इसकी उपयोगिता से विश्व को रूबरू करवाने का श्रेय रमक झमक को

1 month ago
सावा संस्कृति का प्रसार प्रचार कर इसकी उपयोगिता से विश्व को रूबरू करवाने का श्रेय रमक झमक को

सावा संस्कृति का प्रसार प्रचार कर इसकी उपयोगिता से विश्व को रूबरू करवाने का श्रेय रमक झमक को
बीकानेर। दस फरवरी को होने वाले पुष्करणा ब्राह्मण समाज के ओलंपिक सावे के दौरान इस वर्ष नवयुगल चन्द्रशेखर उमा के नाम से दाम्पत्य सूत्र में बंधेंगे। रमक झमक द्वारा सोमवार को बारहगुवाड़ स्थित कार्यालय में इसके पोस्टर का विमोचन किया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए समाजसेवी राजेश चूरा ने कहा कि पुष्करणा ब्राह्मण समाज का सामूहिक सावा सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा है, जो कि सादगी और मितव्ययता की मिसाल है। आज के दौर में यह अत्यंत प्रासंगिक है।रमक झमक ने सावा संस्कृति को न केवल जीवंत रखा हे बल्कि विश्व पटल पर प्रचार प्रसार कर इसकी उपयोगिता बताई है।
पंडित अशोक ओझा ने कहा कि विद्वानों द्वारा शास्त्र सम्मत चर्चा के पश्चात यह मुहूर्त निर्धारित किया है। उन्होंने सामूहिक विवाह के दौरान रमक झमक द्वारा की जाने वाली व्यवस्थाओं के लिए आभार जताया। शिक्षाविद् श्रीरामजी व्यास ने कहा कि पुष्करणा ब्राह्मण समाज का ओलंपिक सावा देशभर में विख्यात है। विभिन्न क्षेत्रों के लोग इसे देखने बीकानेर आते हैं। कर्मचारी नेता भंवर पुरोहित ने कहा कि आज दूसरे समाज हमारी इस परम्परा से प्रेरणा लेकर सामूहिक विवाह कर रहे हैं। ओलंपिक सावे में हमारी अधिक से अधिक भागीदारी होनी चाहिए। शिक्षाविद् श्री राजेश रंगा ने कहा कि आने वाले पंद्रह दिन शहर के लिए बेहद खास है। इसमें रमक झमक जैसी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एसबीआई के सेवानिवृत्त चीफ मैनेजर एमएमएल पुरोहित ने कहा कि रमक झमक के संस्थापक स्व. पंडित छोटूलाल ओझा की परंपरा का निर्वहन करते हुए रमक झमक के प्रयास इसे प्रोत्साहित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक डॉ. हरि शंकर आचार्य ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सामूहिक विवाह को प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह अनुदान जैसी योजना चलाई जा रही है। प्रत्येक पात्र युगल को इसका लाभ मिले, इसके प्रयास किए जाएं। उन्होंने मेले के दौरान प्रशासनिक स्तर पर की जाने वाली व्यवस्थाओं के बारे में बताया। पूर्व पार्षद दुर्गादास छंगाणी ने कहा कि ओलंपिक सावे के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लोगों को बीकानेर की संस्कृति से रूबरू करवाया जाए। रमक झमक के संयोजक प्रहलाद ओझा भैरू ने संस्था द्वारा सावे के दौरान की जाने वाली व्यवस्थाओं के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा गत बीस वर्षों से ओलंपिक सावे को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
नारायण ओझा ने सावे से जुड़ी विभिन्न तिथियों के बारे में बताया। रामकुमार छंगाणी ने आभार जताया।

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