Khulasa Online
Breaking
• भारत बोला - हम अकेले जिसने होर्मुज में नाविक खोए, इस संकट का समाधान बातचीत से ही संभव, ऑनलाइन बैठक में 60 देश शामिल हुए • एसआई भर्ती -2025 के एग्जाम से पहले सुप्रीम-कोर्ट का बड़ा आदेश • ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अमेरिकी हमले में घायल, पत्नी की मौत; दावा- पाकिस्तान उनके जरिए ही ईरान से सीजफायर वार्ता कर रहा था • इस बार जनगणना में क्या खास : आपसे कौन से सवाल पूछे जाएंगे, अगर जनगणना कर्मी घर नहीं आए तो क्या करना होगा? • सिन्थेसिस के 120 विधार्थियो ने 80 प्रतिशत् से अधिक अंक राजस्थान बोर्ड 12वीं विज्ञान वर्ग में प्राप्त किये • भारत बोला - हम अकेले जिसने होर्मुज में नाविक खोए, इस संकट का समाधान बातचीत से ही संभव, ऑनलाइन बैठक में 60 देश शामिल हुए • एसआई भर्ती -2025 के एग्जाम से पहले सुप्रीम-कोर्ट का बड़ा आदेश • ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अमेरिकी हमले में घायल, पत्नी की मौत; दावा- पाकिस्तान उनके जरिए ही ईरान से सीजफायर वार्ता कर रहा था • इस बार जनगणना में क्या खास : आपसे कौन से सवाल पूछे जाएंगे, अगर जनगणना कर्मी घर नहीं आए तो क्या करना होगा? • सिन्थेसिस के 120 विधार्थियो ने 80 प्रतिशत् से अधिक अंक राजस्थान बोर्ड 12वीं विज्ञान वर्ग में प्राप्त किये
Arham School
sukhajan
jeevan raksha
Sambhav Hospital
Bansal Group
Bharti

मुफ्त की योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, राज्य सरकार को लगाई फटकार

1 month ago
मुफ्त की योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, राज्य सरकार को लगाई फटकार

मुफ्त की योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, राज्य सरकार को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, राज्य सरकार ने कुछ समुदायों के लिए बिजली टैरिफ में सब्सिडी स्कीम की घोषणा की थी। इससे पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी पर फाइनेंशियल दबाव पड़ा। राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्यों में अपनाई गई मुफ्त सुविधाओं की संस्कृति आर्थिक विकास में बाधा डालती है।

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत समेत जजों ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा ज्यादातर राज्य पहले से ही घाटे में हैं, फिर भी विकास को छोड़कर मुफ्त सुविधाएं बांट रहे हैं। कोर्ट ने साफ कहा- जो लोग भुगतान नहीं कर सकते, उन्हें सहायता देना समझ में आता है। लेकिन अमीर-गरीब में फर्क किए बिना सबको मुफ्त देना गलत नीति है। इस दौरान कोर्ट ने चेतावनी दी और कहा अगर सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली मिलती रही तो लोगों में काम करने की भावना कम हो जाएगी।

'विकास के कामों के लिए पैसा कहां से आएगा?'
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'कई राज्य सरकारें भारी कर्ज और घाटे के बावजूद मुफ्त योजनाएं बांट रही हैं। अगर सरकारें मुफ्त पैसे, बिजली या दूसरी सुविधाएं देती रहेंगी, तो आखिर इनका खर्च कौन उठाएगा? अगर सरकारें मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली जैसी सुविधाएं देती रहेंगी, तो विकास के कामों के लिए पैसा कहां से आएगा?' सीजेआई ने कहा कि कई राज्य पहले से ही घाटे में हैं, फिर भी वे नई-नई कल्याण योजनाएं शुरू कर रहे हैं। कोर्ट ने कैश ट्रांसफर व मुफ्त सुविधाओं की घोषणा करने की वित्तीय समझदारी पर सवाल उठाया और कहा कि राज्यों को मदद बढ़ाने के बजाय रोजगार पैदा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।

कोर्ट का राज्यों को दी सलाह और पूछा सवाल
वहीं कोर्ट ने राज्यों को सलाह दी कि मुफ्त चीजें बांटने के बजाय, रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा, भारत में हम कैसी संस्कृति बना रहे हैं? क्या यह वोट पाने की नीति नहीं बन जाएगी? फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। अब अगली सुनवाई में तय होगा कि ऐसे मुफ्त बिजली योजनाओं पर क्या नियम लागू होंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
यह मामला इसलिए बड़ा है क्योंकि कई राज्यों में चुनाव से पहले मुफ्त योजनाएं घोषित होती हैं और इससे सरकारी खर्च बढ़ता है, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि गरीबों की मदद जरूरी है, लेकिन बिना सोच-समझ सबको मुफ्त सुविधाएं देना देश के विकास के लिए सही नहीं है।

BC

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Share: