Khulasa Online
Breaking
• यहां पटाखा फैक्ट्री में धमाका, 18 की मौत, 6 घायल, कई मलबे में दबे; सीएम ने जताया दुख • ट्रंप की आखिरी चेतावनी : राष्ट्रपति बोले - डील मानो, वरना अंधेरे में डूबेगा ईरान; पाकिस्तान में कल फिर वार्ता • पीएम मोदी ने 30 मिनट देश को किया संबोधित, जानें क्या बोले पीएम • केंद्र सरकार ने इतने प्रतिशत बढ़ाया महंगाई भत्ता, 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को होगा फायदा • देश को दहलाने की साजिश नाकाम, दिल्ली पुलिस ने दबोचे चार खतरनाक आतंकवादी, राम मंदिर और संसद थे निशाना, हो चुकी थी रेकी • यहां पटाखा फैक्ट्री में धमाका, 18 की मौत, 6 घायल, कई मलबे में दबे; सीएम ने जताया दुख • ट्रंप की आखिरी चेतावनी : राष्ट्रपति बोले - डील मानो, वरना अंधेरे में डूबेगा ईरान; पाकिस्तान में कल फिर वार्ता • पीएम मोदी ने 30 मिनट देश को किया संबोधित, जानें क्या बोले पीएम • केंद्र सरकार ने इतने प्रतिशत बढ़ाया महंगाई भत्ता, 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को होगा फायदा • देश को दहलाने की साजिश नाकाम, दिल्ली पुलिस ने दबोचे चार खतरनाक आतंकवादी, राम मंदिर और संसद थे निशाना, हो चुकी थी रेकी

भारत समेत दुनियाभर में इंटरनेट ठप होने का खतरा, जंग से होर्मुज में बिछीं केबल्स को नुकसान की आशंका

rk
2 weeks ago
भारत समेत दुनियाभर में इंटरनेट ठप होने का खतरा, जंग से होर्मुज में बिछीं केबल्स को नुकसान की आशंका

भारत समेत दुनियाभर में इंटरनेट ठप होने का खतरा, जंग से होर्मुज में बिछीं केबल्स को नुकसान की आशंका

नई दिल्ली। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित होने से दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस के बाद अब इंटरनेट ठप होने का खतरा है। इसकी वजह यह है कि होर्मुज रूट से न केवल दुनिया का 20% कच्चा तेल और 25% LNG गुजरती है, बल्कि इस रास्ते के नीचे इंटरनेट केबल्स भी बिछीं हैं।

अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह इलाका सिर्फ एनर्जी चोकपॉइंट नहीं, बल्कि एक डिजिटल चोकपॉइंट भी है।

समुद्र के नीचे से गुजरता है 97% ग्लोबल डेटा

अक्सर लोगों को लगता है कि इंटरनेट सैटेलाइट के जरिए चलता है, लेकिन हकीकत अलग है। दुनिया का करीब 95 से 97% डेटा फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है।

ये केबल्स समुद्र के नीचे बिछी होती हैं। भारत को यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया से जोड़ने वाली मुख्य केबल्स इसी रूट के पास से गुजरती हैं। इसमें SEA-ME-WE, AAE-1 और EIG जैसे बड़े केबल सिस्टम शामिल हैं।

भारत के लिए क्यों बड़ा है खतरा?

भारत की डिजिटल इकोनॉमी काफी हद तक इन समुद्री रूट्स पर निर्भर है। भारत का ज्यादातर इंटरनेशनल इंटरनेट बैंडविड्थ अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से होकर आता है।

लेटेंसी बढ़ जाएगी: अगर केबल्स को नुकसान होता है, तो ट्रैफिक को लंबे 'पैसिफिक रूट' पर डायवर्ट करना पड़ेगा। इससे लेटेंसी यानी डेटा ट्रैवल टाइम बढ़ जाएगा।
इंटरनेट स्लो होगा: यूट्यूब, इंस्टाग्राम और नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बफरिंग बढ़ जाएगी। वीडियो कॉल और क्लाउड सर्विस में भी दिक्कतें आ सकती हैं।

BC

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Share: