राजस्थानी भाषा को राजभाषा बनाना व 8वीं अनुसूची में शामिल करना अब जनभावना का प्रश्न: डॉ. कुमार गणेश
राजस्थानी भाषा को राजभाषा बनाना व 8वीं अनुसूची में शामिल करना अब जनभावना का प्रश्न: डॉ. कुमार गणेश
बीकानेर। देश के ख्यातिप्राप्त अंक-ज्योतिषी एवं प्रख्यात विचारक डॉ. कुमार गणेश के बीकानेर प्रवास के दौरान आज राजस्थानी मोट्यार परिषद, बीकानेर के प्रतिनिधिमंडल ने उनके निवास पर भेंट कर राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने व राजस्थान राज्य में राजस्थानी भाषा को राजभाषा बनाने की मांग को लेकर विस्तृत चर्चा की।
इस अवसर पर डॉ. कुमार गणेश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाना केवल एक सांस्कृतिक विषय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जनभावना, पहचान और स्वाभिमान से जुड़ा हुआ प्रश्न है। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अब इस विषय में और विलंब उचित नहीं है।
उन्होंने राजस्थानी भाषा आंदोलन से जुड़े संगठनों के प्रयासों की सराहना करते हुए हर स्तर पर सहयोग देने का आश्वासन दिया और कहा कि यह आंदोलन अब निर्णायक चरण में है, जिसमें समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
गौरतलब है कि डॉ. कुमार गणेश देशभर में एक प्रतिष्ठित अंक-ज्योतिषी होने के साथ-साथ एक प्रखर चिंतक एवं लेखक भी हैं, जिनकी सलाह अनेक राष्ट्रीय स्तर के व्यक्तित्व लेते रहे हैं।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में एडवोकेट हिमांशु टाक, राजेश चौधरी, प्रशांत जैन, एडवोकेट राजेश कड़वासरा, कमल किशोर मारू सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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