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बीकानेर की 5 वर्षीय लाडली ने रचा इतिहास: एक हाथ से हवा में 'कार्टव्हील', जुबां पर दुनिया के देशों का भूगोल

Bansal sadi
3 months ago
बीकानेर की 5 वर्षीय लाडली ने रचा इतिहास: एक हाथ से हवा में 'कार्टव्हील', जुबां पर दुनिया के देशों का भूगोल

बीकानेर की 5 वर्षीय लाडली ने रचा इतिहास: एक हाथ से हवा में 'कार्टव्हील', जुबां पर दुनिया के देशों का भूगोल

महान्या सिंह राजपुरोहित ने झटके दो वर्ल्ड रिकॉर्ड; नन्ही जिम्नास्ट अब 'बेस्ट सेलर' लेखिका भी बनीं

बीकानेर | प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, इस कहावत को बीकानेर की 5 वर्षीय नन्ही परी महान्या सिंह राजपुरोहित ने सच कर दिखाया है। महान्या ने अपनी शारीरिक चपलता और विलक्षण याददाश्त का ऐसा हैरतअंगेज प्रदर्शन किया है कि पूरी दुनिया दंग रह गई है। मात्र 5 साल की उम्र में इस 'वंडर किड' ने 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज कराकर बीकानेर के साथ-साथ पूरे देश का मान बढ़ाया है।

असंभव को किया संभव: 6 मिनट 18 सेकंड में, 50 कार्टव्हील और विश्व ज्ञान का संगम

भाजपा नेता गुमान सिंह राजपुरोहित की पौत्री महान्या ने रिकॉर्ड बनाने के दौरान जो किया, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने अपनी शारीरिक और मानसिक मजबूती का परिचय देते हुए 6 मिनट 18 सेकंड में लगातार 50 'कार्टव्हील' (जिम्नास्टिक कलाबाजी) किए। हैरानी की बात यह रही कि हर कार्टव्हील के साथ वे टेलीविजन स्क्रीन पर बदल रहे देशों के झंडे पहचान रही थीं । चक्रवात की गति से घूमते हुए भी उन्होंने सटीकता के साथ देश का नाम, उसकी राजधानी और वहां स्थित 'यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट' का नाम बताकर जजों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मल्टी-टैलेंटेड 'वंडर गर्ल': जिम्नास्ट, आर्चर और अब लेखिका
महान्या की प्रतिभा केवल मैट (जिम्नास्टिक) तक सीमित नहीं है। वह एक वेल-ट्रेंड आर्चर (तीरंदाज) भी हैं। इतना ही नहीं, इस छोटी सी उम्र में उन्होंने अपनी लेखनी का लोहा भी मनवाया है। उनकी पहली किताब "महान्या- द वारियर ऑन द मैट" (Mahanya- The Warrior on the Mat) हाल ही में प्रकाशित हुई है, जो कि बच्चों के लिए एक आनंददायक और प्रेरणादायक पुस्तक है जो साहस, कल्पना और दृढ़ संकल्प का गुणगान करती है। यह युवा पाठकों को खुद पर विश्वास करने, मजबूत बने रहने और कभी हार न मानने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह किताब वर्तमान में अमेजन पर 'बेस्ट सेलर' श्रेणी में ट्रेंड कर रही है।
सफलता का मंत्र: माता-पिता का सहयोग और अटूट मेहनत
अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर नन्ही महान्या ने परिपक्वता के साथ कहा:
"इस सफलता का पूरा श्रेय मेरे माता-पिता और परिवार को जाता है। उन्होंने न केवल घर में मेरे लिए अभ्यास का सेटअप तैयार किया, बल्कि मुझे पेशेवर कोचिंग भी दिलाई। अब मेरा अगला लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भारत का तिरंगा लहराना है।"
परिवार में जश्न का माहौल
महान्या की इस उपलब्धि से माता प्रतिभा सिंह और पिता पुष्पेंद्र सिंह राजपुरोहित सहित पूरे राजपुरोहित समाज और बीकानेर के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है। सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक इस नन्ही खिलाड़ी को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

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