खाड़ी तनाव का असर: कच्चा तेल 30% उछला, भारत में पेट्रोल-डीजल 10–15 रुपये महंगा होने की आशंका
खाड़ी तनाव का असर: कच्चा तेल 30% उछला, भारत में पेट्रोल-डीजल 10–15 रुपये महंगा होने की आशंका
खुलासा। ईरान की ओर से खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर नए हमलों के बाद 19 मार्च को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों में करीब 30% तक की तेज़ी दर्ज की गई है। जंग शुरू होने के बाद से भारत में कच्चे तेल की कीमतें लगभग दोगुनी होकर 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसके चलते आने वाले दिनों में देश में पेट्रोल और डीजल के दाम 10 से 15 रुपये तक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। देश इराक, सऊदी अरब, रूस और यूएई से कच्चा तेल खरीदता है। इन विभिन्न स्रोतों से खरीदे गए तेल के औसत मूल्य को ही ‘इंडियन बास्केट’ कहा जाता है, जो भारत के लिए तेल कीमतों का प्रमुख संकेतक होता है।
कच्चे तेल के प्रमुख बेंचमार्क
दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें मुख्य रूप से तीन बड़े बेंचमार्क पर तय होती हैं—ब्रेंट, WTI और OPEC बास्केट।
ब्रेंट क्रूड: उत्तरी सागर से निकाला जाता है और वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी पर आधारित है।
WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट): अमेरिका में उत्पादित, उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल, जो अमेरिकी बाजार का प्रमुख मानक है।
OPEC बास्केट: सऊदी अरब, ईरान, इराक जैसे देशों के तेल का औसत मिश्रण, जिसे OPEC संगठन तय करता है।
भारत पर असर को ऐसे समझें
1. पेट्रोल-डीजल और LPG महंगे होने की आशंका
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल और 50% से ज्यादा गैस आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। जंग के बाद ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर से बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है। अगर यह स्तर बरकरार रहता है, तो सरकारी तेल कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों पर ईंधन बेचना मुश्किल हो जाएगा, जिससे 10–15 रुपये तक की बढ़ोतरी संभव है।
2. सरकार पर बढ़ेगा दबाव
फिलहाल सरकारी तेल कंपनियां अपने मुनाफे में कटौती कर कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में कहा है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, यदि अगले 1-2 सप्ताह तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार को ईंधन के दाम बढ़ाने का फैसला लेना पड़ सकता है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर सीधे भारत की आम जनता की जेब पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और बढ़ने की संभावना है।
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