Khulasa Online
Header Ad 1
Breaking
• किराए पर ईवीएम मंगवाकर चुनाव करवाएगा राजस्थान, स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में होगा इस्तेमाल • महात्मा गांधी की मूर्ति हुई चोरी, 426 किलोग्राम वजनी कांस्य प्रतिमा को काटकर ले गए चोर • यह होंगे नए मुख्यमंत्री, भाजपा विधायक दल की बैठक में हुआ फैसला • अमेरिकी ट्रेड डील पर भारत सरकार का आया पहला बयान, जानें क्या कहा ? • बुधवार को शहर के अलग अलग समय पर अलग जगह बिजली इतने घंटो तक रहेगी बंद • किराए पर ईवीएम मंगवाकर चुनाव करवाएगा राजस्थान, स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में होगा इस्तेमाल • महात्मा गांधी की मूर्ति हुई चोरी, 426 किलोग्राम वजनी कांस्य प्रतिमा को काटकर ले गए चोर • यह होंगे नए मुख्यमंत्री, भाजपा विधायक दल की बैठक में हुआ फैसला • अमेरिकी ट्रेड डील पर भारत सरकार का आया पहला बयान, जानें क्या कहा ? • बुधवार को शहर के अलग अलग समय पर अलग जगह बिजली इतने घंटो तक रहेगी बंद
Sidebar Ad 1
Sidebar Ad 2
Sidebar Ad 3
Article Ad 1

अन्ना हजारे का अंतिम संघर्ष: लोकायुक्त कानून की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू

4 days ago
अन्ना हजारे का अंतिम संघर्ष: लोकायुक्त कानून की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू

अन्ना हजारे का अंतिम संघर्ष: लोकायुक्त कानून की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू

खुलासा न्यूज़। भ्रष्टाचार के खिलाफ देश की मजबूत आवाज रहे वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार से उन्होंने अपने पैतृक गांव रालेगणसिद्धी में आमरण अनशन शुरू कर दिया। अन्ना ने इस आंदोलन को अपना ‘अंतिम संघर्ष’ बताते हुए साफ किया है कि लोकायुक्त कानून लागू होने तक उनका अनशन जारी रहेगा। अनशन शुरू करने से पहले मीडिया से बातचीत में अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “सरकार सिर्फ फाइलों और वादों का दिखावा कर रही है। अगर सरकार वाकई ईमानदार है और भ्रष्टाचार खत्म करना चाहती है, तो लोकायुक्त कानून से डर क्यों रही है?” अन्ना ने स्पष्ट किया कि यह कानून जनहित के लिए बेहद जरूरी है और अब वे किसी भी खोखले आश्वासन में नहीं आने वाले।

तीन साल का इंतजार, भरोसा टूटा

अन्ना हजारे ने बताया कि लोकायुक्त कानून की मांग कोई नई नहीं है और यह मुद्दा पिछले तीन वर्षों से लंबित है— 2022 में अनशन: देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्रियों के आश्वासन पर अनशन तोड़ा गया था। मंजूरी के बाद भी देरी: विधानसभा, विधान परिषद और राष्ट्रपति तक पहुंचने के बावजूद कानून लागू नहीं हुआ। समिति की अनदेखी: सरकार द्वारा गठित समिति के सुझावों को नजरअंदाज कर दिया गया।

फडणवीस सरकार पर सीधा प्रहार

अन्ना ने साफ कहा कि पिछली बार समिति बनाकर आंदोलन को शांत किया गया, लेकिन इस बार ‘कमेटी-कमेटी’ का खेल नहीं चलेगा। 80 वर्ष से अधिक उम्र होने के बावजूद उनके तेवर आज भी 2011 के आंदोलन जैसे ही नजर आ रहे हैं। यादवबाबा मंदिर परिसर में शुरू हुआ यह अनशन अब सिर्फ एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता की उम्मीद बन चुका है। अन्ना हजारे ने दो टूक कहा— “जब तक लोकायुक्त कानून का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, मेरा अनशन जारी रहेगा। अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं है।”

Article Ad 2
Footer Ad 2
Tags: #BIKANER NEWS
Share: