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वसंत का महत्व संगीत साहित्य एवं कला के साथ आध्यात्मिक भी है-कमल रंगा

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9 months ago
वसंत का महत्व संगीत साहित्य एवं कला के साथ आध्यात्मिक भी है-कमल रंगा

वसंत का महत्व संगीत साहित्य एवं कला के साथ आध्यात्मिक भी है-कमल रंगा

बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान द्वारा आयोजित होने वाले दो दिवसीय वसंतोत्सव के प्रथम दिन आज प्रातः नत्थूसर गेट बाहर स्थित लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन परिसर में मां सरस्वती के भव्य मन्दिर में सरस्वती स्तोत्रम् पाठ के साथ प्रारंभ हुआ। मन्दिर प्रन्यास के राजेश रंगा एवं तोलाराम सारण ने बताया कि आज प्रातः पुजारी विजय कुमार छंगाणी के सानिध्य में विधि-विधान से मां सरस्वती को समर्पित उक्त 108 पाठ का पठन कर पूजन किया गया। इस अवसर पर वसन्तोत्सव के खास तौर से आध्यात्मिक महत्व पर अपनी बात रखते हुए राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने बताया कि वसन्त उत्सव जहां भारतीय संगीत, साहित्य एवं कला में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसी तरह इसका अपना आध्यात्मिक महत्व है। तभी तो कालिका पुराण में भी वसन्त का सुंदर वर्णन मिलता है।
रंगा ने आगे कहा कि भगवान कृष्ण ने गीता में स्वयं को ऋतुओं का वसंत कहा है वे स्वयं सारे देवताओं और परम शक्तियों में सबसे अलग है। वैसे ही वसंत ऋतुओं में अलग पहचान रखते हुए ऋतुओं की राजा कहलाता है। इस अवसर पर शिक्षाविद् भवानीसिंह, हरिनारायण आचार्य ने भी वसंत के महत्व को रेखांकित करते हुए उसकी प्रासंगिकता बताई। कार्यक्रम का संचालन युवा संस्कृतिकर्मी आशीष रंगा ने किया एवं सभी का आभार मन्दिर प्रन्यासी तोलाराम सारण ने ज्ञापित किया।

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