आज से शुरू होगा राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र, जनहित के सवालों पर भजनलाल सरकार की होगी परीक्षा
आज से शुरू होगा राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र, जनहित के सवालों पर भजनलाल सरकार की होगी परीक्षा
जयपुर। राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो रहा है। सत्र की शुरुआत राज्यपाल हरिभाऊ बागडे के अभिभाषण से होगी। इस बार बजट सत्र भले ही छोटा रहने की संभावना है, लेकिन इसके हंगामेदार और सियासी रूप से गर्म रहने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं। संभावित रूप से 11 फरवरी को राज्य का बजट पेश किया जाएगा, हालांकि इसकी अंतिम तारीख पर फैसला आज विधानसभा की कार्य सलाहकार समिति (बीएसी) की बैठक में लिया जाएगा। एक ओर भजनलाल सरकार बजट और अपनी उपलब्धियों को लेकर तैयारी में जुटी है, वहीं कांग्रेस समेत विपक्ष ने ओएमआर शीट गड़बड़ी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखे टकराव के आसार हैं। बजट सत्र के हंगामेदार होने की सबसे बड़ी वजह ओएमआर शीट विवाद है। कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि भाजपा ने विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए विधायक दल की बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच बयानबाजी ने माहौल और गरमा दिया है।
जनता की उम्मीदें: विधानसभा में उठें ये बड़े सवाल
प्रदेशभर में जनता आज भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है। लोगों की अपेक्षा है कि विधानसभा में इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो— जल संकट: पड़ोसी राज्यों से जल बंटवारे पर क्या प्रगति हुई? रामजलसेतु लिंक परियोजना: इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने में क्या स्थिति है? सड़क और एक्सप्रेस-वे: घोषित परियोजनाएं जमीन पर कब उतरेंगी? निवेश और रोजगार: एमओयू के बाद वास्तविक निवेश और नौकरियां कितनी मिलीं? कानून-व्यवस्था: बढ़ते अपराधों पर सरकार की रणनीति क्या है? सरकारी भर्तियां: वादे और हकीकत में कितना अंतर? अरावली में अवैध खनन: 20 जिलों में फैले संकट पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं? हाईवे किनारे शराब दुकानें: हाईकोर्ट आदेश के बावजूद सुप्रीम कोर्ट क्यों गए? मेडिकल पीजी प्रवेश: माइनस 40 अंक पर प्रवेश का आधार क्या है? पर्यटन विकास: दो साल में पर्यटन बढ़ाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए?
राज्य की वित्तीय सेहत पर भी सवाल
केंद्र से मिलने वाले अनुदान में कितना बदलाव हुआ? राज्य पर कुल कर्ज कितना है और उसे नियंत्रित करने की योजना क्या है? बजट में पूंजीगत खर्च और सामाजिक क्षेत्र पर कितना फोकस रहेगा? शिक्षा और स्वास्थ्य की जमीनी हकीकत। आरटीई और प्री-प्राइमरी: केंद्र से फंड न मिलने पर राज्य संसाधन कहां से लाएगा? सरकारी स्कूलों की हालत: जर्जर भवनों की मरम्मत का रोडमैप क्यों नहीं? चिकित्सा शिक्षा: मेडिकल पीजी प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल।
मनरेगा के बाद नया कानून भी एजेंडे में
मनरेगा की जगह लाए गए वीबी जी-राम-जी कानून में राज्यों पर अधिक वित्तीय बोझ पड़ेगा। ऐसे में राजस्थान में रोजगार गारंटी कैसे लागू होगी और ग्रामीण मजदूरों को कितना लाभ मिलेगा—यह भी अहम मुद्दा रहेगा।
सत्र का शेड्यूल
28 जनवरी: राज्यपाल का अभिभाषण, श्रद्धांजलि के बाद सदन स्थगित
29 जनवरी: अभिभाषण पर बहस शुरू
31 जनवरी व 1 फरवरी: अवकाश
3 फरवरी: सरकार का जवाब संभावित
11 फरवरी: बजट पेश होने की संभावना
मार्च में संभावित पंचायतीराज चुनावों को देखते हुए सरकार की कोशिश है कि बजट मार्च के पहले सप्ताह तक पारित करवा लिया जाए। ऐसे में यह सत्र भले ही छोटा हो, लेकिन राजनीतिक तेवर तीखे रहने तय माने जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या विधानसभा में सियासी शोर से ऊपर उठकर सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे असल मुद्दों पर ठोस चर्चा हो पाती है या नहीं—यही इस बजट सत्र की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।