शिक्षा का नया मॉडल लाने की तैयारी: अंग्रेजी माध्यम के सरकारी स्कूलों में फिनलैंड पैटर्न पर पढ़ाई होगी - Khulasa Online

शिक्षा का नया मॉडल लाने की तैयारी: अंग्रेजी माध्यम के सरकारी स्कूलों में फिनलैंड पैटर्न पर पढ़ाई होगी

जयपुर। राज्य में अंग्रेजी माध्यम के सरकारी स्कूलों में फिनलैंड पैटर्न पर पढ़ाई होगी। इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दल शिक्षा पैटर्न का अध्ययन करने फिनलैंड जाएगा। इसके बाद राज्य के सरकारी अंग्रेजी स्कूलों में इसे लागू किया जाएगा। राज्य में 2 साल पहले खोले महात्मा गांधी स्कूलों के प्रति अभिभावकों में खासा रुझान है। इनमें प्रवेश के लिए सीटों के मुकाबले कई गुणा अधिक आवेदन आ रहे हैं। इससे उत्साहित शिक्षा विभाग इन स्कूलों के पढ़ाई के पैटर्न को विश्वस्तरीय बनाना चाहता है। विश्व में स्कूली शिक्षा के लिए फिनलैंड पैटर्न श्रेष्ठ माना जाता है। शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने भी फिनलैंड पैटर्न का अध्ययन कर इसे लागू करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि पिछले दिनों 33 अंग्रेजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं खोलने का आदेश जारी किया गया था। देश में सरकारी स्कूलों में प्री प्राइमरी स्कूल खोलने वाला राजस्थान पहला राज्य है। राजस्थान मॉडल का यूपी-बिहार भी करेंगे अध्ययन राजस्थान में सरकारी स्तर पर पहली बार खोले गए अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के मॉडल को लेकर देश के कई राज्यों ने रुचि दिखाई है। डोटासरा का कहना है कि उत्तरप्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने यहां के मॉडल का अध्ययन करने की इच्छा जाहिर की है। वे भी अपने यहां इस तर्ज पर अंग्रेजी स्कूल खोलना चाहते हैं। फिनलैंड में शिक्षकों को दी जाती है बेहतरीन ट्रेनिंग फिनलैंड के शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान भी विश्वस्तरीय हैं। वहां शिक्षक बनना आसान नहीं है। योग्यता स्नातकोत्तर तय है। बेहतरीन प्रशिक्षण दिया जाता है। खास तौर पर सिखाया जाता है कि बच्चों में सीखने के लिए उत्सुकता कैसे पैदा करें। दूसरे देशों में टीचर ट्रेनिंग में पहले चीजें समझाई जाती हैं, फिर स्कूल में बताए गए बिंदुओं पर अमल करना होता है। फिनलैंड के पढ़ाई पैटर्न की ये हैं विशेषताएं बच्चों को वैज्ञानिक तरीके से पढ़ाने पर जोर। पढ़ाई का पैटर्न रिसर्च आधारित। क्षमता व योग्यता को अंक के आधार पर नहीं आंका जाता, न ही बच्चों के तुलनात्मक विकास पर चर्चा। फिनलैंड में सभी बच्चों को निशुल्क प्राथमिक शिक्षा का समान अधिकार प्राप्त है। किसी खास पैटर्न पर चलने की बजाय शिक्षक नए तरीके अपनाते हैं। क्लास रूम में बच्चों को प्रत्येक 45 मिनट से एक घंटे तक की पढ़ाई के बाद कम से कम 15 मिनट का ब्रेक लेना अनिवार्य किया हुआ है। प्रायोगिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाता है। अधिकारियों को कहा है, फिनलैंड जाकर वहां की पढ़ाई देखें। फिर यहां लागू करने पर मंथन करें। - गोविंद सिंह डोटासरा, शिक्षामंत्री
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