पुष्करणा सावा: घर, भवन, बगीची और कोटड़ी तक बुक, निभाई जा रही परंपराएं
पुष्करणा सावा: घर, भवन, बगीची और कोटड़ी तक बुक, निभाई जा रही परंपराएं
बीकानेर। पुष्करणा सावा नजदीक आते-आते सभी मैरिज पैलेस, भवन, समाज की बगीची सब बुक हो गए हैं। यहां तक कि परकोटे की कोटडी बाड़े और बगीचे तक बुक कर लिए गए हैं। अब चौक चौराहे या जहां कहीं खाली पड़ी जमीन के सद्पयोग के लिए साफ सफाई करवाई जा रही है। जिनके मकान बहुत छोटे है वे चंवरी घर में करने एवं अन्य आयोजन खुली जगह देख कर करेंगे। कहीं भी पर्याप्त जगह नहीं मिलने से जलदाय विभाग की टंकी के पास सरकार की खुली जमीन सफाई कराई गई है।
एक दिन टेंट लगाकर उसका सदुपयोग किया जाएगा। ऐसा इसलिए करना पड़ रहा है, क्योंकि शहर में इस दिन शादियां अपेक्षा से अधिक होने की उम्मीद है। शहर का हर पंडित भी बुक हो चुका है, उन्हें 2-3 शादियां करवानी पड़ेगी। पंडितों के पास भी 3 से 4 चंवरी तय है। विवाह बंधन में बंधने वाले कन्याओं व युवकों के हाथधान की रस्म आज पुष्करणा समाज के सामूहिक विवाह समारोह में विवाह बंधन में बंधने वाले कन्याओं व युवकों के हाथधान की रविवार को होगी। वर के हल्दी लगाई जाएगी। महिलाएं मगरे रा मूंग मंगावो ए,म्हारी पीठी सरस करावो ए, सोई पीठी लाड़लड़ो रे अंग होयसी व लख ले लख ओ लाड़लड़ा तथा नहायले धोयले ओ लाड़लड़ा सरीखे गीत गाएगी। हाथधान की रस्म के दौरान भगवान गणेश का पूजन भी होगा।
विवाह करने वाले लड़के-लड़कियों द्वारा पूजन उपरान्त केशरियां वस्त्र धारण किए जाएंगे। घर- परिवार की महिलाओं द्वारा अटाळ,पीठी, लख-लख ले,अंगल-मंगल,बड़ी निर्माण,सप्तधान पूजन इत्यादि की पारंपरिक रस्मों का निर्वहन करेंगे। हाथधान के बाद बन्ना-बन्नड़ी ननिहाल लडूड़ी चढ़ाने पहुंचंगे। इससे पूर्व सावा के दिन जिन लड़कियों का विवाह होना है। उनके हाथधान की रस्म पहले होगी। लग्न वाचन की रस्म का निर्वहन किया जाएगा। फिर लड़कों के हाथ धान होंगे। हाथधान के साथ बन्नावा देने की रस्म निभाई जाएगी। हाथधान की रस्म के साथ-साथ पारम्परिक रुप से मांगलिक गीतों के आयोजन की जाएंगे।