Khulasa Online
TM Jewellers
Bansal sadi
Breaking
• बीकानेर: अचानक पैर फिसल कर गिरा व्यक्ति, टांके में डूबने से हुई मौत • बड़ी खबर: निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, 3 को सुरक्षित निकाला गया • सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश • NEET पेपर लीक मामले में पुणे का केमेस्ट्री प्रोफेसर गिरफ्तार, CBI ने बताया मास्टरमाइंड • मौसम अपडेट: मानसून तय समय से पहले देगा दस्तक, जाने राजस्थान में कब होगी झमाझम बारिश • बीकानेर: अचानक पैर फिसल कर गिरा व्यक्ति, टांके में डूबने से हुई मौत • बड़ी खबर: निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, 3 को सुरक्षित निकाला गया • सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक कुत्तों को दे मौत का इंजेक्शन! अधिकारियों को दिए निर्देश • NEET पेपर लीक मामले में पुणे का केमेस्ट्री प्रोफेसर गिरफ्तार, CBI ने बताया मास्टरमाइंड • मौसम अपडेट: मानसून तय समय से पहले देगा दस्तक, जाने राजस्थान में कब होगी झमाझम बारिश
jeevan raksha
Sambhav Hospital
Bharti

हर स्कूल में लड़कियों को सैनेटरी पैड मिले नियम का उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द होगी

rk
5 months ago
हर स्कूल में लड़कियों को सैनेटरी पैड मिले नियम का उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द होगी


हर स्कूल में लड़कियों को सैनेटरी पैड मिले नियम का उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द होगी
नई दिल्ली।  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देश के सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया कि हर स्कूल में लड़कियों को फ्री में सैनेटरी पैड बांटना अनिवार्य होगा। लडक़े और लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाने होंगे। जो स्कूल ऐसा नहीं कर पाएंगे उनकी मान्यता रद्द की जाएगी।
इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में दिव्यांग-अनुकूल (डिसेबल-फ्रेंडली) टॉयलेट बनाए जाएं।
जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने क्लास 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में केंद्र सरकार की मेंस्ट्रुअल हाइजिन पॉलिसी (मासिक धर्म स्वच्छता नीति) को पूरे भारत में लागू करने पर यह आदेश सुनाया।
अगर स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट नहीं हैं तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 (बराबरी का अधिकार) का उल्लंघन है। अगर लड़कियों को सैनिटरी पैड नहीं मिलते। तो वे लडक़ों की तरह बराबरी से पढ़ाई और गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पातीं।
मासिक धर्म के दौरान सम्मानजनक सुविधा मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का हिस्सा है। अगर लड़कियों को उचित सुविधा नहीं मिलती तो उनकी गरिमा और निजता प्रभावित होती है।

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Share: