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कलेक्टर ने पूछा क्या पढ़ते हो अखबार में ?, दी सलाह, ‘किताबों से बाहर निकल कर भी देखो’,

बीकानेर । सफलता कैसे हासिल की जाती है ? क्या सफल लोग वाकई कुछ अलग काम करते हैं ? या वे कुछ अलग तरीके से काम करते है ं? सफलता का राज क्या है और कैसे आप अपना लक्ष्य हासिल करके अपने जीवन में सफल बन सकते हैं ? कुछ ऐसे ही सवाल-जवाब गुरूवार को रवीन्द्र रंगमंच पर ’काॅफी विद कलक्टर कुमार पाल गौतम द्वारा किए गए नवाचार में सुनने को मिले।
जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने युवाओं को अपनी राह चुनने के लिए मार्गदर्शन हेतु इस प्रोग्राम की शुरूआत की है। जिले के युवाओं को माॅटिवेट करने का यह कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा, ऐसे उन्होंने संकेत दिए। इस कार्यक्रम में शहर की इंजीनियरिंग काॅलेज (इसीबी), डूंगर काॅलेज, कोचिंग संस्थान,काॅलेज आॅफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलाॅजी,पशुपालन विज्ञान काॅलेज, मरूधरा इंजीनियरिंग काॅलेज सहित अन्य शिक्षण संस्थानों के करीब 50 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
’काॅफी विद कलक्टर’ कार्यक्रम के लिए रवीन्द्र रंग मंच के खुले प्रागण में मंच सजाया गया था। मंच पर 6 गोल मेज लगाई गई थी, जिस पर विद्यार्थियांे से बारी-बारी जिला कलक्टर ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य को लेकर बनाऐ गए छात्रों के प्लान के बारे में जानकारी ली। साथ ही भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी निगम आयुक्त प्रदीप के. गवांडे, उप खण्ड अधिकारी रिया केजरिवाल तथा राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) ए.एच.गौरी, एडीएम (सिटी) सुनीता चैधरी तथा यूआईटी सचिव मेघराज मीना ने भी विद्यार्थियों को केरियर के संबंध में टिप्स दिए।
जिला कलक्टर ने कहा कि आपके करियर का चुनाव आपसे ही से शुरू होता है, आपका व्यक्तित्व, आपका शौख, आपका रुझान ही आपके करियर के चुनाव में सहायक होगा। बस जरूरत है तो सही समय पर अपने रूचि का पता लगाने की और उसके बारे में जानने की। आपको सही ऑप्शन समझ नहीं आ रहा की आपको आगे क्या करना चाहिए तो इसके लिए आपकी रूचि के मुताबिक मार्ग दर्शन लेेना चाहिए।

परीक्षा के वक्त निराश ना हो-उन्होंने कहा कि पूरे साल जिस परीक्षा का तुम्हें इंतजार रहता है, उससे घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि एक ही टाॅपिक पर अलग-अलग पुस्तके पढ़ने नहीं चाहिए। इससे भ्रमित होने की संभावना रहती है।  विद्यार्थियों का अपने नोटस बनाकर, परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा एग्जाम को क्लियर करने की आपकी क्या रणनीतियाँ होनी चाहिए, आपको क्या पढ़ना है और कितना पढ़ना है, इन सभी चीजों  को ध्यान रखना चाहिए।

किताबों के अलावा पत्र-पत्रिकाआंे का करें अध्ययन-इस दौरान विद्यार्थियों ने उन्हें बताया कि वर्तमान में वही पुरानी किताबे और पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। पाठ्यक्रम में बदलाव की जरूरत है, आधुनिक तकनीक पर आधारित  और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम लागू होने चाहिए। इस पर जिला कलक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों की यह चिन्ता कुछ हद तक सही कही जा सकती है लेकिन आप सभी को अवेयनेस होकर अध्ययन करने की जरूरत है। पत्र-पत्रिकाओं का निरन्तर अध्ययन से किताबी ज्ञान के अलावा जानकारी मिलेगी,जो आपके ज्ञान वृद्धि में सहायक सिद्ध होगी।
बैसिक कन्सेप्ट क्लियर होना चाहिए-उन्होंने कहा कि जीवन में लक्ष्य हासिल करने के लिए आपके विषय-वस्तु के बारे में बैसिक कन्सेप्ट क्लियर होना चाहिए। हर छोटी से छोटी घटना अथवा विषय के प्रति जागरूकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव आएंगे,नकारात्मक विचार आएंगे, लेकिन आपको सकारात्मक सोच के साथ लक्ष्य हासिल करना है। काम वही करें, जिसमें आपकी रूचि है। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी नकारात्मकता नहीं होनी चाहिए। अक्सर किशोरावस्था में छात्रों को कुछ ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसे वे आम तौर पर किसी से ना तो शेयर कर पाते हैं और ना ही उनका कोई नजदीकी उनकी इस समस्या को समझ पाता है। इस अवस्था में छात्र अमूमन सामाजिक चिंता, अवसाद या शर्म जैसी भावनाओं से ग्रस्त होते हैं। उन्होंने कहा कि इस अवसाद से ंऊभरने के लिए सबसे अच्छा उपाय है जीवन में हमेशा सकारात्मक सोच से आगे बढे। उन्होंने कहा कि हमारे ये सकारात्कम और मूल्य-आधारित संस्कार हमें हीन भावना से ग्रस्त होने से भी बचाते हैं।
आप आईएएस कैसे बने ?- जब जिला कलक्टर विद्यार्थियों से अपने जीवन के अनुभव साझा कर रहे थे, तब एक छात्र ने पूछा आप भारतीय प्रशासनिक सेवा में कैसे आए, तो उन्होंने ने कहा कि वे एक मीडिल क्लास परिवार से है,पिता लेखा सेवा में थे। पिताजी से प्ररेणा मिली।  कौन क्या करता है, क्या है और कौन क्या कहता है, इससे मुझे कभी कोई सरोकार नहीं रहा। उन्होंने बताया कि विज्ञान विषय में डिग्री की और कला विषय में एमए। उन्होंने कहा कि हमेशा अपने आस-पास घटने वाली घटनाओं, देश और विदेश में क्या हो रहा है,आर्थिक, राजनैतिक, विज्ञान सहित अन्य विषयों के प्रति जागरूक रहा। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन से ही एक लक्ष्य निर्धारित रखकर अध्ययन किया। विद्यार्थी को समय का कुशल प्रबंधन के साथ तैयारी करनी चाहिए और ऐसा ही मैंने किया।
बीकानेर का भविष्य उज्जवल-इस दौरान जब एक छात्र ने पूछा कि बीकानेर के विकास के लिए आपके जहन में क्या है तो उन्होंने कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है। यहां के नागरिक बहुत ही अच्छे और संस्कारवान है। आप सभी से हुई बातचीत से भी यही सार निकला कि यहां के युवा परिपक्व है और अपने प्रदेश और देश के प्रति सकारात्मक सोच रखते है।