विश्वास किस पर करें: बैक मैनेजर व कैशियर ने मिलकर खातें से लाखों रुपये का किया गबन - Khulasa Online

विश्वास किस पर करें: बैक मैनेजर व कैशियर ने मिलकर खातें से लाखों रुपये का किया गबन

बीकानेर। राजस्थान मरूधरा ग्रामीण बैंक खाजूवाला में बैंक के कैशियर द्वारा गबन करने का मामला सामने आया है। कैशियर जनकराज ने खाताधारकों को खातों में पैसे जमाने कराने की रसीद तो दे दी लेकिन उनके खाते में पैसे जमा ही नहीं किए। वह बैंक के भी 2 लाख 52 हजार 480 रुपए लेकर फरार हो गया। खाजूवाला मरूधरा ग्रामीण बैंक के मैनेजर नारायण मीणा ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी। इसके बाद बीकानेर से जांच के लिए एक टीम खाजूवाला भेजी गई। जांच टीम में बीकानेर के पवन कुमार और लूणकरणसर के अक्षय कुमार शामिल थे। इन्होंने खाजूवाला में अलग-अलग लोगों के बयान लिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार को बैंक मैनेजर नारायण मीणा और कैशियर जनकराज को सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंशन के दौरान मैनेजर नारायण मीणा का मुख्यालय श्रीगंगानगर और कैशियर जनकराज का मुख्यालय नागौर किया गया है। अस्थायी तौर पर जीयाराम को मैनेजर का चार्ज दिया गया है। सवालों के घेरे में जिम्मेदारों की भूमिका : राजस्थान मरूधरा ग्रामीण खाजूवाला में मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों व पेंशनधारियों के बड़ी संख्या में खाते हैं लेकिन इस तरह रुपए बैंक के खाताधारकों के खातों में जमा नहीं करने व बैंक के रुपए कम पडऩे पर भी जिम्मेदार बैंक मैनेजर ने पुलिस थाना में कोई रिपोर्ट नहीं दर्ज करवाई। इससे बैंक मैनेजर की लापरवाही भी संदेह के घेरे में है। इसलिए बैंक के उच्चाधिकारियों को चाहिए कि जांच कर दोषी कार्मिकों को सिर्फ सस्पेंड ही नहीं सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। पूर्व बैंक मैनेजर महेंद्रसिंह मीणा की पत्नि विमला मीणा के नाम से रिपोर्ट भी दी गई हैं लेकिन कैशियर व बैंक मैनेजर को उच्चाधिकारियों द्वारा बीकानेर तलब करने पर इसका समाधान नहीं हो पाया हैं। इस मामले सहित अन्य खातों की जांच के लिए सोमवार को बीकानेर से एक टीम खाजूवाला पहुंचेगी, जो संपूर्ण जानकारी जुटाएगी। ऐसे सामने आया मामला : जांच में सामने आया कि शादियों में बर्तन साफ करने वाले वार्ड 11 निवासी अतू खान ने 21 सितंबर को 1 लाख 20 हजार रुपए अपनी पत्नी कमो खातून के खाते में जमा करवाए थे। आरोप था कि कैशियर जनकराज ने रुपए जमा करने की रशीद मोहर लगा व हस्ताक्षर कर दे दी। परंतु यह राशि उसके खाते में जमा ही नहीं करवाई। इसका पता खाताधारक को उस समय लगा जब वह खाते में एंट्री करवाने पहुंचा। उसने जब इसकी शिकायत की तो कैशियर के परिजनों ने रुपए देने का आश्वासन दिया। इसी तरह इसी बैंक में पूर्व मैनेजर महेंद्र सिंह मीणा की पत्नी विमला मीणा ने अपने केसीसी खाते से 27 सितंबर को 10 लाख 60 हजार रुपए निकलवाए। जब कैशियर ने भुगतान किया तो गिनती करने पर सामने आया कि नोटों की गड्डियों में नोट कम थे। जब बैंक मैनेजर ने राशि गिनती की तो पता चला कि किसी गड्डी में 10 तो किसी में 20 से 28 नोट कम थे। इस तरह पूरी रकम में 70 हजार रुपए कम थे। कैशियर के परिजनों ने बैंक व खाताधारक के रुपए लौटा दिए लेकिन मामले में बैंक मैनेजर ने कैशियर पर कोई कार्रवाई नहीं की।

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