निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने जारी की गाइडलाइन, लेकिन सवाल यह कि इस गाइडलाइन की पालना कौन करवाएगा? - Khulasa Online निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने जारी की गाइडलाइन, लेकिन सवाल यह कि इस गाइडलाइन की पालना कौन करवाएगा? - Khulasa Online

निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने जारी की गाइडलाइन, लेकिन सवाल यह कि इस गाइडलाइन की पालना कौन करवाएगा?

खुलासा न्यूज, बीकानेर। शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए गाइडलाइन जारी की है। जिसके तहत सख्त हिदायत दी गई है कि अगर किसी ने गाइडलाइन की पालना नहीं की तो उस स्कूल के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। बता दें कि यह गाइडलाइन प्रत्येक नया सत्र शुरू होने से पहले जारी होती है, लेकिन शहर के अधिकांश स्कूल शिक्षा विभाग की गाइडलाइन के अनुसार काम नहीं कर रहे, जिनके खिलाफ शिक्षा विभाग की ओर से कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। ऐसे में बच्चों के अभिभावक भी यह बात कर रहे है कि शिक्षा विभाग की गाइडलाइन महज एक फॉर्मल्टी है। जिसका नतीजा यह है कि शहर के अधिकांश स्कूल इस गाइडलाइन की पालना नहीं कर रहे। अधिकांश स्कूल्स हर वर्ष फीस में बढ़ोतरी कर रहे है, बुक्स व स्टेशनरी तय दुकानों को खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर कर रहे है, किसी प्रकार की सूचना स्कूल बोर्ड पर चस्पा नहीं की जा रही, पीएसपी पोर्टल पर सूचनाएं अपलोड नहीं की जा रही, जो फीस अभिभावकों से स्कूल वसूल रहे है उसको पीएसपी पोर्टल पर अपलोड नहीं कर शिक्षा विभाग या कमेटी द्वारा तय फीस को ही विभाग को बताया जा रहा है, जबकि बच्चों के अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जा रही है। फीस के अलावा स्कूल में छोटे-छोटे कार्यक्रम पर बच्चों से घर से पैसे मंगवा लिये जाते है, जबकि गाइडलाइन के अनुसार फीस के अलावा स्कूल एक पैसा नहीं ले सकता, अगर ऐसा हो रहा है तो नियमों के अनुसार गलत है। ये खेल अधिकांश स्कूलों में चल रहा है, लेकिन न जाने शिक्षा विभाग किसी नींद में सो रहा है। शिक्षा विभाग द्वारा कभी औचक निरीक्षण स्कूलों में नहीं किया जा रहा। नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ अभिभावकों ने बताया कि विभाग को शिकायत करने के बावजूद संबंधित स्कूल के खिलाफ एक्शन नहीं लिया जाता, जबकि मनमानी के पूरे दस्तावेज उनके पास उपलब्ध होते है। स्कूली वाहनों में बच्चों की बिठाने की लिमिट संख्या है, लेकिन वाहनों में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर भरकर ले जाया जा रहा है। कोई अभिभावक स्कूल में इस संबंध में शिकायत करता है तो उसे बच्चे का एडमिशन काटने की धमकी दी जाती है। ऐसे में अभिभावक भी डर के मारे चुप रहता है।

शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन

प्रदेश के स्कूलों में पैरंट्स टीचर्स मीटिंग का आयोजन किया जाए। स्कूल स्तरीय फीस कमेटी का गठन हो कमेटी के सदस्यों का नाम, पता और उनके मोबाइल नंबर पीएसपी पोर्टल पर अपडेट हो।
स्कूल स्तरीय फीस कमेटी द्वारा अनुमोदित फीस का बुरा पीएसपी पोर्टल पर सालाना और मासिक मद में पीडीएफ बनाकर अपडेट करना अनिवार्य है।
स्कूल स्तरीय फीस कमेटी द्वारा अनुमोदित फीस के अलावा किसी भी तरह का शुल्क वसूलना फीस एक्ट के खिलाफ है। ऐसे में स्कूल प्रशासन द्वारा फीस के नाम पर की गई वसूली को फिर से स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को लौटाना होगा।
स्कूल स्तरीय फीस कमेटी द्वारा निर्धारित फीस तीन शैक्षणिक सत्रों के लिए होगी। सिर्फ कुछ वक्त के लिए नहीं।
प्राइवेट स्कूल जहां माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, सीबीएसई, सीआईएससीई, सीएआईई जैसे से मान्यता प्राप्त है। उनके नियमों और उपनियमों की पालना करते हुए शैक्षणिक सत्र के लिए किताबों का चयन करना होगा। जिसकी जानकारी लेखक का नाम, किताब की कीमत के साथ शैक्षणिक सत्र शुरू होने से एक महीने पहले ही स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य है। ताकि पेरेंट्स उन्हें बाजार से भी खरीद सके।
प्राइवेट स्कूलों में पाठ्य सामग्री, स्टेशनरी, यूनिफॉर्म, जूते, टाई, बेल्ट जैसे सामान की बिक्री के लिए शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन की शत प्रतिशत पालना होनी चाहिए।
प्राइवेट स्कूलों में विशेष योग्यजन (दिव्यांग) स्टूडेंट और फीमेल स्टूडेंट्स के लिए बनाए गए नियमों की शत प्रतिशत पालन होनी चाहिए।
स्टूडेंट्स पर मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा की शिकायतों की त्वरित सुनवाई के साथ ही दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्यवाही होनी चाहिए।
प्राइवेट स्कूलों में पेरेंट्स टीचर मीटिंग का आयोजन किया जाए। जिसमें स्टूडेंट से जुड़ी समस्याओं के साथ स्कूल मैनेजमेंट संबंधी समस्याओं पर भी चर्चा हो इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध करना अनिवार्य होगा।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन और समस्त सूचनाओं स्कूलों को अपने नोटिस बोर्ड पर चस्पा और वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

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