राज्य के मुख्यमंत्री ने अचानक दे दिया अपने पद से इस्तीफा

जालंधर। इसके साथ ही कैप्टन से मिलने वाले विधायक अमरिंदर के सरकारी आवास में मुलाकात के बाद कांग्रेस भवन चले गए हैं। सूत्रों का कहना है कि वे शाम 5 बजे होने वाली विधायक दल की बैठक से पहले ही इस्तीफा दे सकते हैं और राज्यपाल से विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि हाईकमान का रुख देख कैप्टन के करीबियों ने भी उनसे दूरी बना ली है। इस बीच, कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे रणइंदर सिंह ने ट्वीट कर बताया कि उनके पिता सीएम पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। चंडीगढ़ में कैप्टन अमरिंदर सिंह के घर पर उनके गुट के विधायकों की बैठक जारी है। सूत्रों के मुताबिक इस मीटिंग में सिर्फ 10-12 विधायक शामिल हुए हैं, इनमें 4 मंत्री भी बताए जा रहे हैं। चंडीगढ़ में कैप्टन अमरिंदर सिंह के घर पर उनके गुट के विधायकों की बैठक जारी है। सूत्रों के मुताबिक इस मीटिंग में सिर्फ 10-12 विधायक शामिल हुए हैं, इनमें 4 मंत्री भी बताए जा रहे हैं। इससे पहले कैप्टन ने कांग्रेस से वरिष्ठ नेता कमलनाथ और मनीष तिवारी से बात कर अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। सूत्रों के मुताबिक कैप्टन ने आज ही पूरी कलह खत्म करने को कहा है। साथ ही धमकी दी है कि उन्हें इस तरह ष्टरू पद से हटाया गया तो वे पार्टी भी छोड़ देंगे। उन्होंने ये संदेश पार्टी हाईकमान तक पहुंचाने के लिए भी कह दिया था। 40 विधायकों ने हाईकमान से की थी कैप्टन की शिकायत कैप्टन से नाखुश 40 विधायकों की चि_ी के बाद कांग्रेस हाईकमान ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया था। उन्होंने शनिवार शाम 5 बजे कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाने की घोषणा कर दी। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद शुक्रवार आधी रात को यह जानकारी शेयर की थी। विधायक दल की मीटिंग के लिए अजय माकन और हरीश चौधरी ऑब्जर्वर बनाए गए हैं और दोनों नेता चंडीगढ़ पहुंच चुके हैं। सिद्धू गुट ने कैप्टन के कांग्रेसी होने पर ही सवाल उठाए सियासी उठापटक के बीच पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिद्धू के रणनीतिक सलाहकार पूर्व ष्ठत्रक्क मुहम्मद मुस्तफा ने कहा है कि पंजाब के विधायकों के पास साढ़े चार साल बाद कांग्रेसी ष्टरू चुनने का मौका है। यानी मुस्तफा ने साफ तौर पर अमरिंदर सिंह के कांग्रेसी होने को ही नकार दिया है। मुस्तफा ने कहा कि 2017 में पंजाब ने कांग्रेस को 80 विधायक दिए। इसके बावजूद आज तक कांग्रेसी ष्टरू नहीं मिला। करीब साढ़े चार साल में कैप्टन ने पंजाब और पंजाबियत के दर्द को दिल से नहीं समझा। ऐसे में अब 80 में से 79 विधायकों के पास सम्मान पाने और जश्न मनाने का मौका आया है।
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