श्रीमद् भागवत कथा/ हमारे कर्मों के कारण ही हमें दु:ख मिलता है : पं. मुरली

सूरदासाणी बगीची में धर्मालु महिला स्व. दुर्गादेवी चूरा की पावन स्मृति में श्रीमद् भागवत कथा का दूसरा दिन

बीकानेर। गोकुल सर्किल स्थित सूरदासाणी बगीची में धर्मालु महिला स्व. दुर्गादेवी चूरा की पावन स्मृति में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन परम पूजनीय महाराज मुरली मनोहर व्यास ने कहा कि भागवत को वेदव्यास जी ने समाधि में तैयार किया। आज गोकर्ण और धुंधकारी की पुण्यफलदायी कथा का श्रवण करवाया गया। द्रौपदी के माध्यम से महाराज ने बताया कि हमारे दु:ख का कारण हमारे कर्म है, और कोई नहीं। जो ब्रह्म को जाने और संसार को बताए वही ब्राह्मण है। इसका पं. व्यास ने गूढ़ अर्थ बताया। उन्होंने अश्वत्थामा द्वारा ब्रह्मास्त्र छोड़े जाने का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि दयालु कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ की रक्षा की। वृतांत सुनाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि गर्भवती माताओं को कृष्ण का चिंतन-मनन करना चाहिए। महाराजश्री ने बताया कि कुंती ने कृष्ण से दु:ख ही मांगा ताकि कृष्ण निकट रहे। गीता में जो भगवान ने कहा है वह भागवत में कर दिखाया है। भागवत में कृष्ण का चरित्र वर्णन है। भीष्म एवं अर्जुन का भयंकर युद्ध का वृतांत सुनाया तो भक्त रोमांचित हो उठे। फिर भीष्म द्वारा देहत्याग करने की कथा सुनायी गयी। कथा का श्रवण रसपान करने हेतू आज पांडाल छोटा पड़ गया।

कथास्थल पर 'भीष्म शरशय्या' सहित अनेक मनमोहक सजीव झांकी सजायी

कथा के दौरान कथा स्थल पर 'भीष्म शरशय्या', क्षीर सागर में शयन करते भगवान विष्णु, चरणों में मां लक्ष्मी तथा ब्रह्मा जी की मनमोहक सजीव झांकी सजायी गयी जिसकी सभी भक्तजनों ने सराहना की। तत्पश्चात् धर्मप्रेमियों द्वारा आरती की गयी।

 
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