अब राज्य के हर थाने में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे

जयपुर: राजस्थान पुलिस में अब पारदर्शिता और बढ़ने वाली है. इसके लिए प्रदेश के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे.अक्सर थानों में पुलिस की कार्यप्रणाली और रवैये को लेकर विवाद होता रहा है.अब थानों में कैमरे लगने के बाद पुलिस थानों में होने वाली ऐसी घटनाओं में कमी आ सकेगी. पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राजस्थान पुलिस एक नया और बड़ा प्रयोग करने जा रही है इस प्रयोग के तहत प्रदेश के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. पुलिसिंग में पुलिस थाने का रोल सबसे अहम और बड़ा होता है,लेकिन अक्सर पुलिस थानों में थानेदार और बाकी पुलिसकर्मियों के व्यवहार और आचरण को लेकर शिकायतें आती रहती हैं. पुलिस हिरासत में मौत के मामले भी लगातार सामने आते रहते हैं, जिससे पूरी पुलिस की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. अब थानों में सीसीटीवी कैमरे लगने के बाद जहां एक और पारदर्शिता बढ़ेगी तो वहीं थाना अधिकारी और थाने का पूरा स्टाफ परिवादियों या थाने में आने वाले आगंतुकों से अच्छा व्यवहार करेगा.

राजस्थान के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम यूं तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देशों के बाद भी किया जाना था,लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में सभी राज्यों को अपने-अपने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के अनिवार्य रूप से निर्देश दिए हैं जिसके बाद प्रदेश में यह काम तेजी से शुरू हो गया है. डीजीपी एम एल लाठर ने इस प्रोजेक्ट का काम तय समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं और डीजीपी खुद इस प्रोजेक्ट की मॉनीटिरिंग भी कर रहे हैं. थानों में कैमरे लगाने के प्रोजेक्ट का काम देख रहे एडीजी टेलीकम्युनिकेशन सुनील दत्त ने बताया कि कैमरे लगवाने के लिए इच्छुक कंपनी का चयन करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने टेंडर जारी कर दिए अक्टूबर के महीने में ही टेंडर खोले जाएंगे जिसके बाद तय प्रक्रिया अपनाकर काम करने वाली कंपनी का चयन किया जाएगा.एडीजी सुनील दत्त ने बताया कि जनवरी में थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए वर्क ऑर्डर दे दिया जाएगा जिसके बाद 6 से 8 महीने में कंपनी को यह काम पूरा करना होगा. पुलिस थानों में कैमरे लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कई तरह के दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनकी पालना सभी राज्यों की पुलिस को करनी होगी. पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत दिशानिर्देश जारी की है जिन की पालना करना सभी प्रदेशों ने शुरू कर दिया है. ADG सुनील दत्त ने बताया कि न्यायालय ने निर्देश दिये हैं कि कि सीसीटीवी प्रणाली में नाइट विजन सुविधा के साथ ही ऑडियो और वीडियो की फुटेज रिकॉर्ड करने की व्यवस्था होनी चाहिए और केंद्र और राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए ऐसी प्रणाली खरीदना अनिवार्य होगा जिनमें कम से कम एक साल और इससे ज्यादा समय तक सीसीटीवी कैमरों के आंकड़ों को संग्रहित कर रखने की सुविधा हो. अदालत के आदेश में यह भी कहा गया है कि हिरासत में यातना और मौत की पुलिस के खिलाफ शिकायत वाले मामलों को देख रही देश की अदालतें और मानवाधिकार आयोग थानों से इन सीसीटीवी फुटेज की मांग कर सकते हैं. जानिए, थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रोजेक्ट: 1- प्रदेश के सभी 892 पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. 2- एक थाने में 16 कैमरे लगाए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यह कैमरे प्रत्येक थाने में प्रवेश और निकासी के स्थान, मुख्य प्रवेश द्वार, हवालात, सभी गलियारों, लॉबी, स्वागत कक्ष क्षेत्र और हवालात कक्ष के बाहर के क्षेत्रों में लगेंगे. 3- कैमरों में 18 महीने की रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से रखनी होगी. 4- राजस्थान पुलिस ने सभी थानों में लगाये जा रहे कैमरों की फीड अभय कमांड सेंटर में रखने की योजना बनाई है. 5- इस प्रोजेक्ट के लिए पुलिस मुख्यालय जनवरी में वर्क ऑर्डर करेगा अगले 6 से 8 महीने में काम पूरा होगा. 6- प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने के लिए पूरे प्रदेश को 3 ब्लॉक में बांटा गया है. 7- इस प्रोजेक्ट में करीब 20 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा. डीजीपी एम एल लाठर के प्रयासों से बीते 1 साल में पुलिस थानों में पुलिस के व्यवहार में काफी बदलाव आया है, लेकिन अभी भी काफी पुलिस थाने ऐसे हैं. जहां पुलिस कर्मियों का व्यवहार आम लोगों से ठीक नहीं है. समय-समय पर पुलिस हिरासत में मौत के मामलों से भी राजस्थान पुलिस की खासी किरकिरी होती है.अब थानों में सीसीटीवी कैमरे लगने के बाद यह माना जा रहा है कि पुलिस थानों में हिरासत में मौत, परिवादियों से दुर्व्यवहार जैसी घटनाओं में कमी आ सकेगी.
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