खेजड़ी बचाओ आंदोलन तेज, आज निकलेगी कलश यात्रा, संत जयपुर से लौटकर बीकानेर पहुंचेंगे
खेजड़ी बचाओ आंदोलन तेज, आज निकलेगी कलश यात्रा, संत जयपुर से लौटकर बीकानेर पहुंचेंगे
खुलासा न्यूज़। बीकानेर में चल रहे खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत सोमवार को कलश यात्रा निकाली जाएगी। वहीं जयपुर में मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद संत समाज भी करीब दोपहर एक बजे बीकानेर पहुंचेगा। इसके बाद आंदोलन की आगे की रणनीति और रूपरेखा तय की जाएगी। इस बीच बीकानेर जिले के कई गांवों में खेजड़ी कटाई के मामले सामने आने से आंदोलनकारियों में रोष है। आंदोलन के संयोजक परसराम बिश्नोई ने बताया कि संत समाज मुख्यमंत्री से वार्ता करने के लिए जयपुर गया हुआ था और आज महापड़ाव स्थल पर पहुंचेगा। संतों के लौटने के बाद ही यह तय होगा कि आंदोलन को आगे किस दिशा में ले जाया जाएगा। उन्होंने बताया कि क्रमिक आमरण अनशन लगातार जारी है और सोमवार को भी करीब 150 पर्यावरण प्रेमी अनशन में शामिल हुए हैं।
पांच स्थानों पर खेजड़ी कटाई
परसराम बिश्नोई ने बताया कि रविवार को ही बीकानेर में पांच अलग-अलग स्थानों पर खेजड़ी के पेड़ काटे जाने की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही पर्यावरण प्रेमी मौके पर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि प्रशासन समय रहते नहीं पहुंच पा रहा और खेजड़ी कटाई रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
अब भी महिलाएं अनशन पर
अनिश्चितकालीन अनशन के बाद शुरू हुए क्रमिक अनशन में बड़ी संख्या में महिलाएं लगातार शामिल हो रही हैं। पेड़ बचाने के संकल्प के साथ एक दिन के अनशन के लिए संघर्ष समिति में नाम लिखाने वालों की भीड़ रोज बढ़ती जा रही है। आंदोलन स्थल पर माहौल लगातार गरमाता जा रहा है और खेजड़ी संरक्षण को लेकर मांगें और तेज हो गई हैं।
रविवार रात मुख्यमंत्री से मिले संत
रविवार रात को भजनलाल शर्मा से उनके सरकारी आवास पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पर्यावरण प्रेमी संतों और बिश्नोई समाज के प्रबुद्धजनों ने मुलाकात की। इस दौरान खेजड़ी संरक्षण के लिए सख्त कानून लाने का मुद्दा उठाया गया। विधानसभा में की गई घोषणा का स्वागत करते हुए संतों ने कानून को और कड़ा बनाने तथा कारावास की सजा का प्रावधान रखने की मांग की। इस मुलाकात में मुकाम पीठाधीश्वर रामानन्द महाराज, संत भागीरथ दास, स्वामी सच्चिदानन्द और शिवदास महाराज शामिल रहे। हालांकि संघर्ष समिति की ओर से कोई प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल नहीं हुआ।