Khulasa Online
Header Ad 1
Breaking
• अग्निवीर वायु भर्ती में युवाओं के लिए बड़ी राहत, अब ये होगी आयु सीमाआवेदन • ट्रम्प बोले- ईरान पर सबसे बड़ा अटैक बाकी, अभी पूरी ताकत से हमला शुरू नहीं किया, हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना • होली पर बन रहा खगोलीय संयोग, चंद्रोदय के साथ चंद्रग्रहण का योग, लाल-तामिया रंग में दिखेगा चांद • इजराइल-ईरान जंग : मोदी ने बहरीन किंग-सऊदी प्रिंस से बात की, ओमान में भारतीय की मौत; बहरीन में भारत ने वीजा-पासपोर्ट सर्विस बंद की • अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर 24 घंटे में गिराए 1200 बम, सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, ईरान बोला - खतरनाक बदला लेंगे • अग्निवीर वायु भर्ती में युवाओं के लिए बड़ी राहत, अब ये होगी आयु सीमाआवेदन • ट्रम्प बोले- ईरान पर सबसे बड़ा अटैक बाकी, अभी पूरी ताकत से हमला शुरू नहीं किया, हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना • होली पर बन रहा खगोलीय संयोग, चंद्रोदय के साथ चंद्रग्रहण का योग, लाल-तामिया रंग में दिखेगा चांद • इजराइल-ईरान जंग : मोदी ने बहरीन किंग-सऊदी प्रिंस से बात की, ओमान में भारतीय की मौत; बहरीन में भारत ने वीजा-पासपोर्ट सर्विस बंद की • अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर 24 घंटे में गिराए 1200 बम, सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, ईरान बोला - खतरनाक बदला लेंगे

फर्जी वसीयत के मामले में पुलिस जांच को अदालत ने किया खारिज

1 month ago
फर्जी वसीयत के मामले में पुलिस जांच को अदालत ने किया खारिज


फर्जी वसीयत के मामले में पुलिस जांच को अदालत ने किया खारिज
बीकानेर । बीकानेर में फर्जी वसीयत की शिकायत पर पुलिस जांच में मामले को झूठा बताए जाने के बावजूद न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पुलिस की जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए आरोपी को न्यायालय में तलब करने के आदेश दिए हैं।
मामला शहर के शेर बानों निवासी, सैयदया चौक, मदिना मस्जिद क्षेत्र का है। परिवादिया शेर बानों ने पुलिस थाना कोतवाली में एफआईआर दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया कि उसके देवर यासीन ने मकान हड़पने की नीयत से उसकी सास जनत की फर्जी हस्ताक्षर कर वसीयत अपने पक्ष में तैयार कर ली।
इस एफआईआर पर पुलिस थाना कोतवाली में जांच की गई और मामले को झूठा मानते हुए न्यायालय में रिपोर्ट पेश कर दी गई। हालांकि परिवादिया शेर बानों ने अपने अधिवक्ता वसीम मकसूद के माध्यम से अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश संख्या एक की अदालत में गवाह अब्दुल गफ्फार के बयान दर्ज करवाए, साथ ही स्वयं के बयान भी न्यायालय में प्रस्तुत किए।
एडवोकेट वसीम मकसूद ने बताया कि न्यायालय ने समस्त तथ्यों की जांच के बाद पाया कि वसीयत पर अंकित हस्ताक्षर प्रथम दृष्टया भिन्न प्रतीत होते हैं। वसीयत का का लाभ लेने वाला यासीन है, जिससे संपत्ति हड़पने की मंशा स्पष्ट होती है। न्यायालय ने माना कि वसीयत छलपूर्वक तैयार की गई और यह एक मूल्यवान प्रतिभूति है।
इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी यासीन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 467 और 468 में संज्ञान लेते हुए उसे तलब करने के आदेश दिए। परिवादिया की ओर से पैरवी एडवोकेट वसीम मकसूद ने की।

Article Ad 2

Join for Latest News

हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएँ

Share: