बीकानेर में घातक हुआ डेंगू, हो रही मौतें, प्रशासन को पड़ गई छिपाने की आदत - Khulasa Online

बीकानेर में घातक हुआ डेंगू, हो रही मौतें, प्रशासन को पड़ गई छिपाने की आदत

- कुशालसिंह मेड़तिया की विशेष रिपोर्ट

- हद है, इंसानी मौत की संख्या में भी आंकड़ों का खेल - डेंगू ने खोली पोल : खतरनाक बीमारी से बचने के लिए सतर्क रहने की जरूरत खुलासा न्यूज, बीकानेर। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभग कोरोना की तरह ही डेंगू पीडि़तों के आंकड़ें भी छिपा रहा है। जिला मुख्यालय ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी डेंगू पैर पसार चुका है, लेकिन प्रशासन की तरफ से हकीकत नहीं बताई जा रही है। डेंगू घातक हो गया है, लोगों की जान लेने लगा है । पिछले तीन दिनों में दो 25 वर्षीय युवकों की मौत हो गई। हद है, इंसानी मौत की संख्या में भी आंकड़ों का खेल है। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को छिपाने की आदत पड़ गई है। 29 अक्टूबर को 25 वर्षीय सेना के जवान की डेंगू के कारण पीबीएम अस्पताल में मौत हो गई। इसे भी प्रशासन ने डेंगू से मौत होना नहीं माना है। जबकि हकीकत तो यह है कि इस संबंध में सुबेदार जगदीश चंद्र सैन ने सदर पुलिस थाने में मर्ग दर्ज करवाई है। बेकाबू डेंगू लोगों की जन लेने लगा है लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में अब तक एक मौत होना बता रहे है। सिस्टम तकनीकी पहलू की आड़ में डेंगू से मौतों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है। एलिजा टेस्ट नहीं होने से पहले मरीज की मौत होने पर चिकित्सा विभाग मौत की वजह अन्य बीमारी मान रहा है। इन नियम-कायदों के बीच कार्ड टेस्ट की आड़ में चिकित्सा विभाग डेंगू की मौतें छिपा रहा है।

क्या कहते है जिम्मेदार आंकड़ा छुपाने जैसी कोई बात नहीं है। मेडिकल कॉलेज से जो रिपोर्ट मिलती है वही बताते है। संदिग्ध को डेंगू नहीं मान सकते है। डेंगू जांच के लिए एलिजा टेस्ट ही प्रमाणित है। - डॉ. ओ.पी.चाहर, सीएमएचओ, बीकानेर

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