उत्तराखंड के चार धाम: इस दिन खुलेंगे केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट - Khulasa Online

उत्तराखंड के चार धाम: इस दिन खुलेंगे केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट

उत्तराखंड. अगले महीने यानी मई में उत्तराखंड के चारधाम मंदिर भक्तों के लिए खुल रहे हैं। अक्षय तृतीया से उत्तराखंड के शीतकाल के लिए बंद मंदिर खुलने शुरू हो जाते हैं। उत्तराखंड के चार धामों की यात्रा यमुनोत्री से शुरू होती है, इसके बाद गंगोत्री, फि र केदारनाथ और फि र बद्रीनाथ धाम के दर्शन के बाद पूरी हो जाती है। गंगा नदी का उद्गम स्थल गंगोत्री है और यमुना नदी का उद्गम स्थल यमुनोत्री है। ये दोनों तीर्थ उत्तरकाशी जिले में हैं। शिव जी का 11वां ज्योतिर्लिंग केदारनाथ है। ये मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। देश और उत्तराखंड के चारधामों में से एक है विष्णु जी का बद्रीनाथ धाम। ये मंदिर चामोली जिले में है। यमुनोत्री उत्तरकाशी जिले में स्थित है। ये मंदिर समुद्रतल से 3235 मी. ऊंचाई पर है। यहां देवी यमुना का मंदिर है। यहीं यमुना नदी का उद्गम स्थल भी है। यमुनोत्री मंदिर टिहरी गढ़वाल के राजा प्रतापशाह ने बनवाया था। इनके बाद मंदिर का जिर्णोद्धार जयपुर की रानी गुलेरिया ने करवाया था। गंगोत्री से गंगा नदी का उद्गम होता है। यहां देवी गंगा का मंदिर है। समुद्र तल से ये मंदिर 3042 मीटर की ऊंचाई पर है। ये स्थान जिला उत्तरकाशी से 100 किमी की दूर है। हर साल गंगोत्री मंदिर मई से अक्टूबर तक के लिए खोला जाता है। बाकी समय में यहां का वातावरण प्रतिकूल रहता है, इसीलिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस क्षेत्र में राजा भागीरथ ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए तप किया था। शिवजी यहां प्रकट हुए और उन्होंने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर उसका वेग शांत किया था। इसके बाद इसी क्षेत्र में गंगा की पहली धारा भी गिरी थी। केदारनाथ उत्तराखंड के चार धामों में तीसरे नंबर पर है। ये मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में 11वां है और सबसे ऊंची जगह ज्योतिर्लिंग है। महाभारत काल में यहां शिवजी ने पांडवों को बेल के रूप में दर्शन दिए थे। ये मंदिर आदिगुरु शंकराचार्य ने बनवाया था। मंदिर करीब 3,581 वर्ग मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और गौरीकुंड से करीब 16 किमी दूरी पर है। ऐसा माना जाता है कि 8वीं.9वीं सदी में आदिगुरु शंकराचार्य ने मौजूदा मंदिर बनवाया गया था। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इसी क्षेत्र में तपस्या की थी। उस समय महालक्ष्मी ने बदरी यानी बेर का पेड़ बनकर भगवान विष्णु को छाया दी थी और खराब मौसम में रक्षा की थी। लक्ष्मी जी के इस सर्मपण से भगवान प्रसन्न हुए थे और उन्होंने इस जगह को बद्रीनाथ नाम से प्रसिद्ध होने का वर दिया था। बद्रीनाथ धाम में विष्णुजी की एक मीटर ऊंची काले पत्थर की मूर्ति स्थापित है। आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा निर्धारित की गई व्यवस्था के अनुसार बद्रीनाथ मंदिर का मुख्य पुजारी दक्षिण भारत के केरल राज्य से होता है। ये मंदिर करीब 3100 मीटर ऊंचाई पर स्थित है।
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