खाली नहीं होगी भंडार की दोनों दुकानों,खन्ना के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित - Khulasa Online

खाली नहीं होगी भंडार की दोनों दुकानों,खन्ना के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित

खुलासा न्यूज,बीकानेर। बीकानेर सहकारी भंडार के महाप्रबंधक को संचालक मंडल की विशेष बैठक में आयोजित की गई। जिसमें सर्वप्रथम हाल ही में कार्यालय में कार्य करते हुए हृदयाघात से दिवंगत हुए कर्मी सुरेन्द्र सेवग को दो मिनट मौन रख कर श्रद्धांजलि दी। बैठक के दौरान भंडार की केईएम रोड स्थित कपड़े की दुकान व जनरल स्टोर को खाली कर नए मालिक को सुपुर्द करने के मुद्दे पर आमराय दुकानें खाली न करने की रही। किन्तु उपाध्यक्ष शिव शंकर हर्ष ,संचालक नूतन जोशी, रविराज सिंह भाटी,संतोष प्रजापत आदि का मत था कि इस संबंध में विभागीय परिपत्र 11.08.2010 के अनुसार सूचना तैयार कराई जाए जिसके आधार पर समुचित अध्ययन कर विचार विमर्श कर निष्पक्ष निर्णय लिया जा सके। सूचना मौके पर ही महाप्रबंधक भंडार अमीलाल सहारण द्वारा तैयार कराई गई। जिस पर विचार विमर्श कर दुकानें भंडार हित एवं उपभोक्ताओं के हितों के मद्देनजर खाली न करने का निर्णय सर्व सम्मति से लिया गया। दूसरा बिंदु वर्चुअल आम सभा बुलाने का रहा। जिसके लिए महाप्रबंधक को नियमानुसार कार्यवाही करने हेतु अधिकृत किया गया । वार्षिक अंकेक्षण हेतु ऑडिटर नियुक्त करने का निर्णय ले आवश्यक कार्यवाही करने हेतु महाप्रबंधक को अधिकृत किया। उसके पश्चात उपाध्यक्ष शिवशंकर हर्ष द्वारा प्रस्तावित अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी समितियां बीकानेर खंड बीकानेर मंगत राम खन्ना के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया। खन्ना द्वारा बार बार भंडार हितों के विपरित एवम अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश जारी करने की नीति की भत्र्सना की गई । बैठक में नगेन्द्रपाल सिंह,करणीसिंह,संतोष प्रजापत,नूतन कुमार जोशी आदि ने निन्दा प्रस्ताव का समर्थन कि या। 'मैंने एक बार जो कमिटमेंट कर दी, तो फिर मैं अपने आप की भी नहीं सुनता बैठक में सदस्यों ने आरोप लगाया कि खन्ना 'मैंने एक बार जो कमिटमेंट कर दी, तो फिर मैं अपने आप की भी नहीं सुनता। की थीम पर चलते है। उन्होंने कहा कि ये जब अढाई दशक पहले सहकारिता सेवा में आये थे, तब से यही संवाद इनके राजकीय जीवन में हर कागज पर दिखाई पड़ता है। बीकानेर के हृदय स्थल और सबसे महंगे बाजार क्षेत्र-केईएम रोड पर स्थित दो दुकानों को खाली करवाने के लिए साहब कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहे। दवा व्यवसाय और गैस एजेंसी के बाद यही दो दुकाने भंडार के व्यवसाय की लाइफ लाइन हैं, जिसकी सालाना बिक्री लगभग तीन करोड़ रुपये है। एक में कपड़े का शोरूम है तो दूसरी दुकाने में जनरल स्टोर। लेकिन साहब ने दुकान मालिक को कमिटमेंट कर दी। फिर हमारे साहब क्या कोई सलमान खान से कम थोड़े ही ना है, जैसा कि 'दंगल में आमिर खान ने कहा था 'म्हारी छोरियां छोरों से कम है के। साहब ने एक बार कमिटमेंट कर दी तो फिर वे अपने आप की भी नहीं सुनते। मंत्री, प्रमुख शासन सचिव, रजिस्ट्रार, संचालक मंडल, कलेक्टर आदि-आदि। ये सब क ौन होते हैं। संचालक मंडल के सदस्यों ने कहा कि साहब ने सबसे पहले एक लिखित आदेश जारी किया, जिसे अत्यंत सजग और नियमों के पक्के रजिस्ट्रार मुक्तानंद अग्रवाल ने उड़ा दिया। यह दांव फेल हुआ तो साहब ने दूसरे प्रयास में कांग्रेसी राज में कांग्रेसी बोर्ड को ही भंग करने की अनुशंसा कर दी, ताकि स्वयं ही भंडार की सत्ता पर काबिज होकर दुकानों को खाली करने सहित अन्य मनमाने निर्णय ले सकें। रजिस्ट्रार के पहले के रुख को देखते हुए साहब को यकीन है कि बोर्ड भंग करने का दांव भी खाली जाने वाला है। तार-तार सहकार सब जानते हैं कि भंडार की उपरोक्त दोनों दुकानें बीकानेर की मोस्ट प्राइम लोकेशन पर स्थित हैं और करीब तीन दशक से भंडार के पास हैं। पूर्व में कभी विवाद नहीं हुआ। लेकिन साहब के बीकानेर स्थित सहकार भवन में प्रवेश करते ही सहकारिता की भावना तार-तार होने लगी। चाहे राज्य सरकार की अनापत्ति के बिना प्राइवेट कम्पनी के कृषि आदान बेचने का लिखित आदेश हो या हनुमानगढ़ जिले के सहक ारी अफसरों को गंगानगर जिले की सहकारी संस्थाओं में अतिरिक्त चार्ज देने का मामला हो या भंडार के बर्खास्त कर्मचारी की बहाली का प्रकरण हो, साहब ने अपनी कार्यशैली के अनुरूप सहकारी अधिनियम, नियम, संस्थाओं के उपनियमों को रद्दी की टोकरी में डालते हुए मनमाने आदेश जारी किये हैं। इन दोनों जिलों में अतिरिक्त चार्ज लेने-देने के न जाने कितने आदेश जारी हुए और कितने बदले गये। जो लोग सहकारिता सेवा में हैं, वे सब जानते हैं कि ट्रांसफर, पोस्टिंग, अतिरिक्त चार्ज के खेल में कितना रस है। बेलगाम, बेखौफ कार्यशैली बोर्ड के कुछ सदस्यों विरोध के बावजूद और राज्य सरकार के तीन मंत्रियों (जिनमें से दो तो बीकानेर जिले के ही हैं) को साहब की करतूतों से लिखित में अवगत कराने के बावजूद, एक ऐसा विवादित अफ सर जोन का निरंतर मुखिया बना हुंआ है और ऊटपटांग आदेश जारी कर रहा है, लेकिन उसे रोकने वाला कोई नहीं। वो भी ऐसा अफसर जो अनुशासनहीनता के कई प्रकरणों का सामना कर रहा है, जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की पाली और हनुमानगढ़ चौकी में प्रकरण विचाराधीन हों, जिसने सात साल पहलेे उप रजिस्ट्रार का चार्ज देने के बावजूद, आज तक पूरा रिकार्ड नहीं सौंपा हो जिसके कार्यकाल में पत्रावलियों का गायब हो जाना नियमित प्रक्रिया है, जिसे कार्यक्षेत्र और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश जारी करने की लत लगी हो, जिसके विरुद्ध दो दर्जन से अधिक शिकायतें नेहरू सहकार भवन के विभिन्न अनुभागों में लम्बित हों और जो जूनियर ज्वाइंट रजिस्ट्रार होते हुए भी सम्भाग का मालिक बना बैठा हो, उसे कौन अदृश्य शक्ति संरक्षण दे रही है, जिसके चलते वह हर बार अपने विरुद्ध मामलों को दबाने और और प्रमोशन व मनचाही कुर्सी पाने में कामयाब हो जाता है।

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