मंत्रिमंडल फेरबदल में बीकानेर से होगी भागीदारी,कयासों को दौर शुरू

खुलासा न्यूज,बीकानेर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नए मंत्रिमंडल में बीकानेर से फेरबदल को लेकर कयास लगने शुरू हो गए हैं। अभी ये तय नहीं है कि किसी मंत्री को हटाया जाएगा या नहीं लेकिन नए विधायकों को मिलने वाले अवसर में खाजूवाला विधायक गोविन्द मेघवाल का नाम जबर्दस्त चर्चा में है। उनकी राह में सबसे बड़ी बाधा ये है कि बीकानेर से तीन में दो विधायक पहले से गहलोत मंत्रिमंडल का हिस्सा है, जबकि एक दर्जन जिले ऐसे भी है, जिन्हें अब तक मंत्री पद नहीं मिला है। दरअसल, बीकानेर की सात विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने तीन पर जीत दर्ज की थी। इसमें डॉ. बी.डी. कल्ला ने बीकानेर पश्चिम, भंवर सिंह भाटी श्रीकोलायत और गोविन्द मेघवाल खाजूवाला से जीते थे। डॉ. कल्ला को केबिनेट मंत्री और भाटी को राज्यमंत्री बना दिया गया। अब पहली बार हो रहे फेरबदल में तीसरे विधायक और दलित नेता गोविन्द मेघवाल का नाम सामने आ रहा है। संकट ये है कि एक ही जिले से तीन विधायक मंत्री बनने पर दूसरे जिलों के विधायक आपत्ति कर सकते हैं। खासकर उन जिलों के विधायक, जहां से अब तक एक भी मंत्री नहीं है। ऐसे करीब एक दर्जन जिले हैं। एक समस्या ये भी है कि वर्तमान विधायक डॉ. बी.डी. कल्ला और भंवरसिंह भाटी को हटाना भी आसान नहीं है। इन दो में से एक को हटाकर ही गोविन्द मेघवाल को मंत्री बनाया जा सकता है। भाजपा में रहते हुए गोविन्द मेघवाल संसदीय सचिव रह चुके हैं, ऐसे में वो इस पद के लिए भी तैयार नहीं होंगे। वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस में उपाध्यक्ष गोविन्द मेघवाल का कद बढ़ाने के लिए गहलोत विचार कर रहे हैं। लेकिन मंत्री पद को लेकर समस्या आ रही है। भंवरलाल का स्थान भरना है राज्य की राजनीति में दलित नेता के रूप में भंवर लाल मेघवाल का बड़ा स्थान था। उनके निधन के बाद से दलित नेता की तलाश की जा रही है। गोविन्द न सिर्फ दलित नेता है, बल्कि उसी संभाग से आते हैं, जिससे भंवरलाल आते थे। इसलिए गोविन्द मेघवाल की दावेदारी काफी मजबूत है। पिछले दिनों पार्टी में उपाध्यक्ष का पद भी इसी कारण मिला था। तेजतर्रार नेता गोविन्द पश्चिमी राजस्थान में दलित वोटों पर प्रभाव डाल सकते हैँ। वो भाजपा के दलित नेता और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल का भी विकल्प है। पंचायत चुनावों में उन्होंने अर्जुनराम के बेटे को हराया था। गहलोत के साथ है मेघवाल गोविन्द कांग्रेस में गहलोत के इर्दगिर्द ही नजर आते हैं। बीकानेर में पिछले दिनों हुए आए गहलोत की श्रीडूंगरगढ़ सभा में भी वो काफी सक्रिय रहे। इससे पहले भी वो हर बार गहलोत के साथ खड़े नजर आए।

रोडे भी बहुत राजनीतिक जानकारों की तो गोविन्द मेघवाल के सामने उनके चितपरिचित प्रतिद्वन्द्वी भी बड़ी बाधा है। पूर्व में भी जिला प्रमुख चुनाव में उनके हाथ प्रमुखी छिन गयी थी।
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