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बीकानेर। प्रधानमंत्री अपने भाषणों में भ्रष्टाचार को खत्म करने की नसीहत अपने अधिकारियों व पार्टी नेताओं को देते आए है। लेकिन उन्हीं की पार्टी के महापौर के कार्यकाल में जिस तरह भ्रष्टाचार उजागर हो रहा है। उससे ऐसा लगता है कि नेताओं के भाषणों में की गई बाते वास्तव में बातें ही होती है। इसके कोई मायने नहीं है। भ्रष्टाचार को खत्म करने की मुहिम को ठेंगा दिखाती बीकानेर नगर निगम की दास्तां में एक ओर अध्याय जुड़ गया है। जहां भ्रष्टाचार का एक बड़ा खुलासा हुआ है। यहां टेण्डर हुए बिना ही ठेकेदार को दिव्य ज्ञान हो जाता है कि उक्त काम मेरे निकलेगा और ठेकेदार निर्माण कार्य में जुट जाता है। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। जिसमें निर्माण कार्य तो आठ दिन पहले ही शुरू हो गया। लेकिन उसके टेण्डर खोलने की तारीख 26 जुलाई 2019 है। मामला करमीसर में सीसी सडक निर्माण का है। यह तब पकड़ में आया जब एक सजग नागरिक मोहन ने महापौर नारायण चोपडा को पत्र लिखकर सारी हकीकत उसके सामने रखी। जिसमें उन्होंने अवगत कराया कि करमीसर वार्ड नं.6 में वर्ष 2014-15 में यूआईटी द्वारा कानाराम के घर से पाटा चौक होते हुए पनाराम के घर तक डामरीकरण किया था व वर्ष 2017-18 में नगर निगम द्वारा फिर कानाराम के घर से पाटा चौके होते हुए रामस्वरूप सारण की दुकान तक डामरीकरण किया गया और अब एक बार फिर कानाराम के घर से पाटा चौक तक सी.सी.रोड का निर्माण करवाया जा रहा है। इस निर्माण कार्य की निविदा जारी कर कॉपी डालने की अंतिम 23 जुलाई 2019 थी, जबकि ठेकेदार द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर सडक की खुदाई 19 जुलाई 2019 को ही कर दी गई। मजे की बात तो यह है कि आयुक्त आज टेण्डर प्रक्रिया पूरी होने की बात कर रहे है और उससे पहले सडक निर्माण की बात से वे अनभिज्ञ है।
शिकायत मिली है,देखते है
करमीसर में सीसी रोड निर्माण कार्य टेण्डर प्रक्रिया पूरी से पहले ही शुरू होने का एक ज्ञापन मेरे पास आया है। इसकी पुष्टि कर जांच की जाएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
प्रदीप के गंवाडे,आयुक्त निगम