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कोलकाता । लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के मुताबिक, कुछ अति महात्वाकांक्षी युवा नेता इसलिए पार्टी से छोड़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि कांग्रेस जल्द केंद्र की सत्ता में नहीं लौटेगी। चौधरी ने माना है कि इन युवाओं के पार्टी छोड़ने से नुकसान होगा, लेकिन यह अस्थायी होगा। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार जैसा करिश्मा किसी और नेता में नहीं है।

अनुशासन और विचारधारा से समझौता नहीं
पार्टी में बगावती सुरों पर चौधरी ने साफ कहा, “हम कुछ लोगों की इच्छाएं पूरी करने के लिए अनुशासन और विचारधारा से समझौता नहीं कर सकते। कुछ युवा नेता व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं पूरी करने के लिए लिए दूसरे विकल्प तलाश कर रहे हैं। या तो वे पार्टी छोड़ चुके हैं, या इस बारे में सोच रहे हैं। हम उनकी सभी मांगें पूरी नहीं कर सकते।”
सिंधिया और पायलट को नजरअंदाज नहीं किया
ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो चुके हैं। राजस्थान में सचिन पायलट भी बगावत कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है। इन दोनों नेताओं के बारे में चौधरी ने कहा- न तो इन्हें नजरअंदाज किया गया और न ही कद कम किया गया। कई पार्टियों में ऐसे नेता होते हैं, जिन्हें मनमाफिक चीजें नहीं मिलतीं। क्या वे सभी पार्टी छोड़ देते हैं? परेशानी ये है कि इनमें भरोसे की कमी है।

सिंधिया-पायलट ने नहीं जिताए चुनाव
सिंधिया द्वारा मध्य प्रदेश और पायलट द्वारा राजस्थान में चुनावी जीत दिलाने के दावों पर भी चौधरी ने सफाई दी। कहा- यह ठीक है कि सिंधिया कैम्पेन कमेटी के प्रमुख थे। अगर ये सच मान भी लें कि चुनाव उनकी वजह से जीते थे तो फिर वे लोकसभा सीट क्यों हार गए। राजस्थान में हर पांच साल में सरकार बदल जाती है। अगर पायलट की वजह से 2018 में विधानसभा चुनाव जीता था, तो 2019 के लोकसभा चुनाव में करारी हार क्यों हुई?

युवा बनाम बुजुर्ग? चौधरी ने क्या कहा
कांग्रेस में युवा बनाम बुजुर्ग नेताओं में टकराव के सवाल पर चौधरी ने नजरिया पेश किया। कहा, “मैं ऐसा नहीं मानता। क्या किसी पार्टी में एक ही उम्र के नेता हो सकते हैं। अगर मेरी उम्र 60 साल से ज्यादा हो गई है तो क्या आप मुझे पार्टी से बाहर फेंक देंगे? भाजपा में अटलजी और आडवाणी जैसे बड़े नेता हुए। नरेंद्र मोदी उनकी लीडरशिप में ही आगे बढ़े। उनकी लीडरशिप ऐसे ही तैयार हुई।”

राहुल के लिए खतरा नहीं थे पायलट या सिंधिया
चौधरी ने इस बात को गलत बताया कि सिंधिया या पायलट जैसे नेताओं को इसलिए किनारे किया गया क्योंकि वे राहुल गांधी के लिए खतरा बन सकते थे। उन्होंने ये जरूर माना कि कांग्रेस खराब दौर से गुजर रही है। कहा- राजनीति में ये बहुत सामान्य बातें हैं। लीडरशिप क्राइसिस का मामला मीडिया की देन है। हमारे पास सोनिया गांधी जैसी नेता हैं। उन्होंने 2004 और 2014 में आम चुनाव जिताए।

अगले अध्यक्ष पर गोलमोल जवाब
चौधरी से जब यह पूछा गया कि सोनिया अंतरिम अध्यक्ष हैं। उनके बाद कौन कमान संभालेगा? इस पर पांच बार सांसद रहे अधीर ने कहा- यह फैसला कांग्रेस वर्किंग कमेटी करेगी। पार्टी में कई अच्छे नेता हैं। गांधी परिवार पार्टी को एकजुट रखने का काम करता है। हम चाहते हैं गांधी परिवार यह कमान संभाले।

गांधी परिवार करिश्माई
चौधरी से पूछा गया कि कांग्रेस गांधी परिवार के अलावा किसी दूसरे नेता को अध्यक्ष क्यों नहीं बनाती। इस पर उन्होंने कहा- क्योंकि, गांधी परिवार जैसा करिश्मा किसी में नहीं है। जब ऐसे नेता मिले तो हमने उन्हें लीडर बनाया। नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी इसके उदाहरण हैं। चौधरी ने कहा- राहुल पार्ट टाइम पॉलिटिशियन नहीं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की सबसे ज्यादा आलोचना की है। मीडिया का एक हिस्सा राहुल के बारे में गलत बातें फैलाता है। जिस दिन हम सत्ता में वापसी करेंगे, आप राहुल को महान नेता मानेंगे।