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छत्तरगढ़ (पुखराज जोशी)। एक ओर तो सरकार योजनाओं के जरिये श्रमिकों काम देकर रोजगार के साधन मुहैया करवाने के लिये प्रयासरत है। लेकिन उनके इन प्रयासों पर किस तरह पानी फिरता है। इसकी बानगी सरकारी नुमाईदों द्वारा ही निर्माण कार्यों में गड़बड़ी कर राजस्व को नुकसान पहुंचाने में देखने को मिलती है। ऐसा ही प्रकरण तहसील के ग्राम पंचायत शेरपुरा में नरेगा कार्य के औचक निरीक्षण में देखने को मिला। जब यहां 3 जोहड़ खुदाई में एक भी श्रमिक नहीं लगा जबकि श्रमिकों के नाम पर करीब बीस से तीस लाख रुपए के करीब उठा लिए गए। गबन का मामला उस समय सामने आया जब लोकपाल अधिकारी सुधा शर्मा इसका निरीक्षण करने पहुंची। मजे की बात तो यह है कि तीन अलग अलग स्थानों पर किये गये निरीक्षण के दौरान स्थानीय अधिकारियों ने तो काम होना बताया। वहीं ग्रामीणों ने लोकपाल को किसी प्रकार के काम नहीं होने की बात कही। जबकि स्वयं दो जगहों के निरीक्षण में लोकपाल को एक भी श्रमिक नहीं मिला।

कागजों में चल रहा है काम
ग्राम पंचायत के चक 1 एसएम के 4 पकवानों में से तीन पकवानों के काम का 6 लाख रूपये का भुगतान होने के बाद भी जोड़ खुदाई के काम में मौके पर एक भी श्रमिक नहीं मिला। यहां डेढ़ सौ गुना डेढ़ सौ फिट चोड़ा और 9 फीट गहरा खुदाई का काम बताया गया। छह व सात एसएम की आबादी में जोड़ निर्माण को लेकर लोक वाला अधिकारी डॉ सुधा शर्मा ने मेट से पूछा कि यहा कितने दिनों से काम चल रहा है तो मेट ने 19 जुलाई से कार्य चलना बताया। वहीं पास खड़े इन्द्र भाटी ने मेट को रोकते हुए कहा यहां श्रमिक आज ही आए हैं,जबकि कागजों में यह काम 16 मई से चल रहा है। जब लोकपाल की टीम लालाबाई जोड़ का काम देखने पहुंची तो वहां पर भी उसे एक भी श्रमिक नहीं मिला।
लोकपाल अधिकारी को नहीं मिले श्रमिक
इस संबंध में लूणकरणसर पंचायत समिति के विकास अधिकारी प्रदीप मायला का कहना है कि हमने तो नरेगा योजना में 3 जोहड़ खुदाई का काम करवाया। जिसमें श्रमिक ों को रोजगार भी दिया अगर श्रमिक काम नहीं कर रहे हैं तो हम क्या कर सकते हैं। हमने तो पैसा उनके खातों में डाल दिया है। वही लोकपाल अधिकारी सुधा शर्मा का क हना है कि 3 जोहड़ खुदाई के कामों में दो जोहड़ में एक भी श्रमिक नहीं मिला एक जोहड़ पर 39 श्रमिक मिले। लेकिन वहां इन्द्रसिंह भाटी,मनीष कुमार गोस्वामी ने बताया की यहां आज ही श्रमिक आये है।
पोल खुलती दिखी तो अधिकारी सामने भिड़ गये
तभी लोकपाल के सामने पोल खुलती दिखी तो शिकायतकर्ता मनीष कुमार को चक वालों ने घेर लिया और गालीगलोच पर उतर आये। मौके के हालात भांपकर लोकपाल अधिकारी इस जोहड़ की बिना जांच किए ही निकल गई।
पूर्व के काम को ही बता रहे है नया काम
तीसरा प्रकरण शेरपुरा ग्राम पंचायत में देखने को मिला,जहां लोकपाल की जांच के दौरान जोहड़ में पानी मिला। लेकिन कोई श्रमिक नहीं दिखाई दिया। इस पर टीम को बताया कि कार्य अभी बंद किया हुआ है। जबकि जोहड़ की जांच में आसपास भी कहीं भी किसी के पैरों के निशान तक नजर नहीं आए ना ही किसी प्रकार की खुदाई की मिली। चौंकाने वाली जानकारी मिली है कि इस जोड़ में पूर्व पंचायत कार्यकाल में कार्य हुआ था जबकि नया कार्य बिल्कुल नहीं हुआ। लोकपाल अधिकारी डॉ सुधा शर्मा को ग्रामीणों ने बताया कि हमने इस वर्ष कोरोना काल में कोई कार्य होते हुए या श्रमिक लगे हुए नहीं देखे जबकि ग्राम विकास अधिकारी व कनिष्ठ अभियंता ने बताया कि यहां तो 3 पखवाड़े से कार्य चल रहा है।
शिकायत के बाद पहुंची टीम
प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां चल रहे फर्जीवाड़े को लेकर जागरुक नागरिकों ने विकास अधिकारी को शिकायत की। लेकिन लाजिमी तौर पर कार्रवाई नहीं हुई और ना होनी थी। इसी कारण गांव के मनीष कुमार गोस्वामी,पठान खाँ,इन्द्र सिंह भाटी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिला कलक्टर बीकानेर वह लोकपाल कार्यालय बीकानेर में शिक ायत 19 जुलाई को की। इसके बाद लोकपाल अधिकारी डॉ सुधा शर्मा के नेतृत्व में जांच टीम आई जिसने शेरपुरा गांव में 3 जोहड़ खुदाई,पंचायत के 6/7 एस एम तथा शेरपुरा पंचायत का निरीक्षण कर हकीकत जानी। इस बारे में लोकपाल सुधा शर्मा ने कहा कि निरीक्षण के दौरान कमियां देखने को मिली है। भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैंने सारा रिकॉर्ड ले लिया है,इसकी जांच करके जल्द से जल्द दोषी कर्मचारी व अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।