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कोरोना वायरस के संक्रमण से दुनिया के 210 से ज्यादा देश जूझ रहे हैं। दुनियाभर के लोगों को एक चीज का बेसब्री से इंतजार है, वह है कोरोना की एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन। अगस्त में रूस के दावा करने के तुरंत बाद चीन ने भी वैक्सीन बना लेने का दावा किया था। हालांकि अबतक दावा किए गए किसी भी वैक्सीन के अंतिम चरण का ट्रायल न ही पूरा हुआ है और न ही नैदानिक परीक्षण के अंतिम परिणाम प्रकाशित किए गए हैं। इसके बावजूद रूस में वैक्सीन लगाया जाना शुरू हो चुका है, जबकि चीन में भी इमेरजेंसी अप्रूवल के जरिए उच्च जोखिम वाले लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। इन उच्च जोखिम समूहों में स्वास्थ्यकर्मी, पुलिसकर्मी, सेना, महामारी रोकथाम में लगे अन्य कर्मी वगैरह आते हैं। चीन में वैक्सीन की बिक्री भी शुरू हो गई है। आइए जानते हैं कि कौन लोग वैक्सीन खरीद सकते हैं और इसकी कीमत क्या रखी गई है:

दरअसल, पूर्वी चीन के एक शहर में क्लिनिकल ट्रायल से अलग प्रायोगिक तौर पर उच्च जोखिम समूह के लोगों के लिए कोरोना वैक्सीन की बिक्री शुरू की गई है। आपातकालीन टीकाकरण कार्यक्रम के तहत वैक्सीन की कीमत 60 डॉलर यानी करीब 4400 रुपए रखी गई है। चीन की राजधानी बीजिंग की सिनोवैक बायोटेक की ओर से विकसित किए गए इस वैक्सीन का नाम CoronaVac है।

पूर्वी चीन के झेजियांग प्रांत के जियाशिंग शहर में स्वास्थ्यकर्मियों, महामारी की रोकथाम में जुटे लोगों, जनसेवा में जुटे लोगों और पोर्ट इंस्पेक्टर्स को CoronaVac वैक्सीन दी जा रही है। चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रायोगिक तौर पर टीकाकरण कार्यक्रम के बाद आम लोगों को भी वैक्सीन लगाई जाएगी। हालांकि खबरों के मुताबिक अभी वैक्सीन की आधिकारिक बिक्री की मंजूरी नहीं मिली है।
जियाशिंग सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, चाइनीज कंपनी सिनोवैक बायोटेक लिमिडेट की ओर से विकसित की गई इस वैक्सीन को 18 से 59 साल के लोगों को 400 युआन (59.5 डॉलर) में दिया जाएगा। सीडीसी ने कहा है कि वैक्सीन की दो डोज जरूरी है, जो 14-28 दिनों के अंतराल पर लगाया जाता है।
जियाशिंग सीडीसी का यह भी कहना है कि वैक्सीन को आधिकारिक रूप से मार्केटिंग के लिए मंजूरी नहीं मिली है, इसे अभी केवल अर्जेंट इस्तेमाल के लिए मंजूर किया गया है। बता दें कि जून के अंत में चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन (NHC) ने चाइनीज वैक्सीन मैनेजमेंट कानून के तहत हाई रिस्क लोगों के लिए वैक्सीन के इमर्जेंसी यूज को मंजूरी दी थी।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वैक्सीन ब्राजील, इंडोनेशिया और तुर्की में आखिरी चरण के ट्रायल में है। कंपनी का कहना है कि तीसरे यानी अंतिम चरण के ट्रायल का अंतरिम विश्लेषण नवंबर की शुरुआत में आ सकता है। एक शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी का दावा है कि जुलाई से अब तक चीन ने हजारों लोगों को प्रायोगिक इस्तेमाल के तहत वैक्सीन लगाई गई है।